Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की निवाली तहसील में प्रस्तावित मोगरी तालाब परियोजना को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच बड़ा विवाद सामने आया है। बता दें कुछ ग्रामीणों ने तालाब निर्माण के लिए चुने गए स्थान पर आपत्ति जताते हुए कलेक्टर से दूसरी जगह परियोजना बनाने की मांग की है। वहीं, जल संसाधन विभाग का कहना है कि इस परियोजना से तीन गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और प्रभावित किसानों को जमीन के बदले चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री पारस परमार के अनुसार, मोगरी नदी पर तालाब क्रमांक-1 का निर्माण ग्राम चिचबा, झरीमाता और कन्डगांव की सीमा पर प्रस्तावित है। इस परियोजना के लिए कुल 42 किसानों की करीब 34 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इनमें एक से दो परिवार पूरी तरह प्रभावित होंगे, जबकि अन्य किसानों की जमीन आंशिक रूप से अधिग्रहित होगी। जिसमें अधिकारी ने बताया कि परियोजना के लिए स्थल का चयन वर्ष 2019 में ग्राम पंचायत झरीमाता की मांग और जनप्रतिनिधियों के निर्देश पर किया गया था। वर्ष 2024 में इसे स्वीकृति मिली। परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति 1730.94 लाख रुपये और निर्माण लागत 804.09 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
विभाग के मुताबिक, मोगरी तालाब में 2.93 मिलियन घनमीटर पानी का संग्रह किया जाएगा। इससे ग्राम चिचबा, झरीमाता और कन्डगांव की करीब 586 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलने की योजना है।
ऐसे में अधिकारी का कहना है कि निवाली तहसील का भौगोलिक क्षेत्र करीब 450 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन अब तक केवल 30 से 35 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ही लघु सिंचाई योजनाएं विकसित हो पाई हैं। अल्पवर्षा के कारण इस वर्ष कई तालाब नहीं भर पाए हैं और भूजल स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में स्थायी जल स्रोत विकसित करना जरूरी है।

जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों की नाराजगी पर विभाग ने स्पष्ट किया कि अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री की घोषणा और जारी सर्कुलर के बाद प्रभावित किसानों को पहले प्रस्तावित दो गुना के स्थान पर चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार, परियोजना का टेंडर भी जारी हो चुका है और किसानों की शंकाओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर को ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर प्रस्तावित स्थल पर आपत्ति जताई थी और तालाब का निर्माण दूसरी जगह कराने की मांग की थी। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की आपत्तियों और सिंचाई परियोजना के उद्देश्य के बीच किस तरह समाधान निकालता है।
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