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Anant Sutra: जानिए कब है अनंत चतुर्दशी और इसके शुभ मुहूर्त, पढे 14 गांठों का रहस्य…

हिंदी पंचांग के अनुसार चतुर्दशी की तिथि साल में चौबीस बार आती है। इसमें से कृष्ण चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी एवं अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी 19 सितंबर, दिन रविवार को पड़ रही है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप का पूजन किया जाता है।

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : हिंदी पंचांग के अनुसार चतुर्दशी की तिथि साल में चौबीस बार आती है। इसमें से कृष्ण चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी एवं अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी 19 सितंबर, दिन रविवार को पड़ रही है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप का पूजन किया जाता है। भगवान विष्णु के शेष अंश, शेषनाग को अनंत भी कहा जाता है। इस दिन अनंत नाग के पूजन के बाद अनंत सूत्र हाथ में बांधने का विधान है। आइए जानते हैं अनंत सूत्र को बांधने की विधि और इसका महत्व…

शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस साल अनंत चतुर्दशी का पर्व 19 सितंबर को पड़ रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 19 सितंबर को सुबह 06 बजकर 07 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 20 सितंबर को सुबह 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इस के बाद पूर्णिमा की तिथि लग जाएगी। इस दिन पूजन के शुभ मुहूर्त ये रहेंगे….

अभिजीत मुहूर्त – 11:56 AM – 12:44 PM

अमृत काल – 08:14 PM – 09:50 PM

ब्रह्म मुहूर्त – 04:42 AM – 05:30 AM

पूजन विधि

अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान आदि निवृत्त हो कर पूजा स्थल पर एक कलश की स्थापना करें। इस कलश पर एक धातु का पात्र रख कर उस पर कुश से भगवान अनंत की स्थापना करनी चाहिए। भगवान विष्णु के शेष नाग को ही अनंत कहा जाता है, आज के दिन उनकी पूजा का विधान है। अनंत भगवान को सूत या रेशम के धागे को हल्दी या केसर से रंग कर उसमें चौदह गांठ लगाएं। इस अनंत सूत्र को भगवान को समर्पित कर पंचोपचार या षोढ़शोपचार विधि से पूजन करें। इस दिन अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा एवं विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजन के बाद दीर्ध आयु और समस्त कष्टों के निवारण के लिए अनंत सूत्र को हाथ में बांधा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु का व्रत करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

अनंत सूत्र के 14 गांठों का रहस्य

अनंत चतुर्दशी के दिन विधि पूर्वक भगवान विष्णु के अनंत रूप का पूजन करने के बाद अनंत सूत्र बांधने का विधान है। अनंत सूत्र या अनंता सूत या रेशम की डोरी से बनाया जाता है। इसे हल्दी या केसर से रंग कर, इसमें चौदह गांठ लगाई जाती है। प्रत्येक गांठ लगाने पर भगवान विष्णु के इन नामों का स्मरण करना चाहिए। पहले में अनंत,उसके बाद ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, बैकुण्ठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविन्द। अनंत सूत्र की चौदह गांठे श्री हरि द्वारा बनाये गए चौदह लोकों का प्रतीक हैं। अनंत सूत्र को पूजन के बाद कच्चे दूध में डुबो कर हाथ पर बांधा जाता है। पुरूषों को इसे दांये हाथ पर व महिलाओं को बांए हाथ पर बांधना चाहिए। अनंत सूत्र बांधते समय ऊँ अनंताय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

अनंत सूत्र का महत्व

अनंत चतुर्दशी और इस दिन अनंत सूत्र बांधने के महात्म का वर्णन अग्नि पुराण और महाभारत में मिलता है। अनंत सूत्र को अनंत जीवन का प्रतीक माना जाता है, मान्यता है कि इसको बांधने से दीर्ध आयु, निरोगी काया की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही अनंता को जीवन के समस्त दुखों और पापों का नाश करने वाला माना जाता है। महाभारत में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों को जुए में हारा हुआ राजपाट पुनः प्राप्त करने के लिए अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने को कहा था। अनंत सूत्र बांधने के बाद चौदह दिनों तक तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से श्री हरि की अनंत कृपा की प्राप्ति होती है।

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