वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया की अक्षय तृतीया कहा जाता है और इस तिथि का शास्त्रों में बड़ा महत्व बताया गया है। दरअसल इसी दिन सतयुग की शुरुआत हुई थी।
अक्षय का अर्थ होता है जिसका कभी क्षय नहीं हो। इसका अर्थ यह हुआ कि इस दिन जो भी काम किया जाता है उसका कभी क्षय नहीं होता।
किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए यह दिन साल का सबसे अच्छा और बेहतरीन दिन माना जाता है। इसके अलावा इस दिन विवाह का अबूझ मुहूर्त भी होता है हालांकि इस साल कोरोना वायरस के संकट के चलते इस दिन शादी नहीं हो पाएगी।
इस वर्ष अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र के साथ अबूझ मुहूर्त पड़ रहा है जो बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए खास शुभ मुहूर्त में ही पूजा करने का विधान है।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का भी बड़ा महत्व होता है। आपको बता दे, अक्षय तृतीया के दिन से ही वेद व्यास जी ने महाभारत ग्रंथ लिखना आरंभ किया था और इसी दिन भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी का जन्मदिवस भी होता है।
शास्त्रों में जिक्र है कि स्वयं माता पार्वती ने इस तिथि के महत्व को धर्मराज को बताया और इसका वर्णन करते हुए कहा कि जो स्त्री मन से इस तिथि पर व्रत रखकर पुण्य कर्म करती है उसे बलवान और बुद्धिमान संतान प्राप्त होती है।
आपको बताते चले, इस दिन कोई भी दुराचार नहीं करना चाहिए, इस दिन मौन रहना और साधना करना सबसे हितकर है।
इस दिन किसी को दी गयी पीड़ा जन्मों तक आपको परेशान कर सकती है। इसलिए इस दिन आप माता लक्ष्मी को प्रसन्न करे और दान पुण्य कर देवताओं का आशीर्वाद ले।