उज्जैनः राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह स्वर्ण जयंती सभागृह सम्पन्न हुआ। कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्री पटेल ने इस अवसर पर कहा कि आज विक्रम विश्वविद्यालय के तीसवें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर अत्यधिक आनन्द का अनुभव हो रहा है। इस दीक्षान्त समारोह में अपनी उपाधियां प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को उन्होंने बधाई देते हुए सभी के यशस्वी एवं मंगलमय भविष्य की कामना की।

राज्यपाल श्री पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज दीक्षांत के पश्चात आप सभी ने समाज के उत्थान और देश की एकता के लिए शपथ ली है। विश्वविद्यालय से जो संस्कार आपको मिले है उन्हें जीवन भर स्मरण रखकर कार्य करें। आपके माता-पिता ने आपको शिक्षित करने के लिए बहुत कष्ट उठाए है इसलिए पढ़ लिखकर अपने माता-पिता की सेवा करें। आप जीवन में कुछ भी बन जाओं परंतु अपने माता-पिता और गुरु के प्रति सदैव आभारी रहना उनकी सेवा करना। शिक्षित होने का उद्देश्य मात्र उपाधि अथवा प्रमाण पत्र पाना नहीं बल्कि समाज और देश की उन्नति में योगदान देकर एक जिम्मेदार नागरिक भी बनना है। इसलिए हम सभी इस बात का हमेश स्मरण रखें।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान और ध्यान के वैश्विक केन्द्र उज्जैन को भगवान श्री कृष्ण ने अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि 7 दशकों के उस समर्पण का परिणाम है, जिसने दुनिया को कुशल मानव संसाधन और श्रेष्ठ स्कॉलर सौंपे। विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने से विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ा है और यहां के विद्यार्थियों के गर्व में वृद्धि हुई है। ऐसे विश्वविद्यालय की उपाधियों से विभूषित होना विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य का विषय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्राप्त कर रहे 397 विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर 181 विद्यार्थियों को डिग्रियां, 198 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, एक शोधार्थी को डी-लिट, 88 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियों से सम्मानित किया जा रहा है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन में सीखने की एक नई शुरुआत है, यह जीवन का महत्वपूर्ण टर्निंग पाइंट है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवाचार में अग्रणी यह विश्वविद्यालय, कृषि अध्ययन शाला और डेयरी टेक्नालॉजी जैसे आधुनिक विषयों को आरंभ करने के लिए पहल करने में भी प्रदेश में प्रथम रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय को विभिन्न यंत्रों के लिए 51 लाख रुपए, कृषि अध्ययन शाला के लिए पांच ड्रोन तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के शैक्षणिक भ्रमण के लिए एक बस प्रदान करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। पिछला वर्ष प्रदेश में निवेश और रोजगार के रूप में मनाया गया। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उज्जैन वर्ष 2028 में भव्य और दिव्य सिंहस्थ का साक्षी बनेगा। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन से लेकर उनके मां क्षिप्रा के जल से स्नान तक की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार अभी से हर संभव तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के आयोजन में स्वच्छता, यात्री मार्गदर्शन, डिजिटल हेल्प आदि का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्यपाल श्री पटेल ने कार्यपरिषद सदस्यों व संकाय अध्यक्षों के साथ समूह चित्र खिंचवाया। इसके पश्चात दीक्षांत समारोह की अकादमिक शोभा यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव शामिल रहें। अतिथियों के आगमन के पश्चात सर्वप्रथम विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर स्थित सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह के प्रारंभ में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान हुआ। अतिथियों के द्वारा मां वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
स्वागत भाषण कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज द्वारा दिया गया। उनके द्वारा विगत 01 वर्ष के दौरान विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके पश्चात कॉमर्स विषय की छात्रा श्वेता तलेसरा को विश्वविद्याालय द्वारा डी-लिट् की उपाधि से अलंकृत किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय के 74 विद्यार्थियों को उपाधि और 107 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा 17 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन का लोकार्पण एवं एमईआरयू (MERU) परियोजना के तहत नव श्रृंगारित भर्तृहरि छात्रावास का लोकार्पण किया। साथ ही अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सम्पादित चार पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
समारोह का समापन राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पश्चात अकादमिक शोभायात्रा का प्रस्थान हुआ। समारोह के पश्चात राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव व अतिथियों द्वारा हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। इस अवसर पर आचार्य विद्यासागर पीठ एवं संस्था द्वारा अतिथियों को हाथ से बनी हथकरघा की सामग्री भेंट स्वरूप प्रदान की गई।