चाणक्य नीति आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित महान ग्रंथ है। इसमें उन्होंने मनुष्यों के कल्याण के लिए कई सूत्र दिए हैं। चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने विवाहित महिलाओं के आचरण और व्यवहार के बारे में भी अपने विचार बताए हैं।
आचार्य ने अपने ग्रंथ में लिखा है कि
न दानैः शुद्ध्यते नारी नोपवासशतैरपि ।
न तीर्थसेवया तद्वद् भर्तु: पादोदकैर्यथा ।।
इसका अर्थ या है कि विवाहित महिला को अपने पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए। व्रत भी अपने पति से पूछकर रखना चाहिए। सुहागिन महिलाओं को सच्ची श्रद्धा के साथ पतिव्रता धर्म का पालन करना चाहिए।
सुहागिन महिलाओं के लिए पति की सेवा उसका सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। इसलिए सभी स्त्रियों को अपना पत्नी धर्म निभाते हुए पति की सेवा करनी चाहिए।
बता दे, चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ कूटनीति में भी निपुण थे। उन्हें कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है।