रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: आचार्य चाणक्य का नाम आते ही लोगो में विद्वता आनी शुरु हो जाती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति और विद्वाता से चंद्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठा दिया था। इस विद्वान ने राजनीति,अर्थनीति,कृषि,समाजनीति आदि ग्रंथो की रचना की थी। जिसके बाद दुनिया ने इन विषयों को पहली बार देखा है। आज हम आचार्य चाणक्य के नीतिशास्त्र के उस नीति की बात करेंगे, जिसमें उन्होने बताया है कि सत्य और मौन से बनती है बात, झूठ बोलना होता है दोधारी तलवार…
आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र में बताया है कि वे झूठ से बचने के लिए मौन का सहारा लेते थे। यही कारण था कि कोई भी उनसे एक शब्द भी उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं कहलवा सकता था। चाणक्य को मित्र और करीबी उन्हें वज्र कुटिल कहते थे। उन्होने अपने नीति और कौशल से सिकंदर के सैन्य क्षेत्रों को तक्षशिला के छात्रों और युवाओं की सेना से ध्वस्त करा दिया था।
आचार्य चाणक्य कभी भी झूठे वाक्य और संदेशों से किसी को भी भ्रमित नहीं किया। ऐसा कभी होने की संभावना पर उनकी साख भी प्रभावित हो सकती थी। आचार्य सदा सत्य ही बोलते थे, उनके अनुयायी उनकी बात को पत्थर की लकीर मानते थे।
सत्ता के चतुर अधिकारियों के बीच रहकर चाणक्य ने रणनीति पर अमल किया। मित्रों के लाख उकसाने के बावजूद वे सदैव मौन रहे। इससे वे स्वयं की और मित्रों की रक्षा कर सके। सत्ता के समर्थक उनके एक झूठ और चूक का इंतजार करते रह गए। अपने मोन से ही आचार्य ने धननंद की सत्ता पलट डाली थी।