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शनिवार के दिन शनि देव पर तेल चढ़ाने के पीछे की वजह चौंका देगी आपको!

By: RNI Hindi Desk 
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शनिवार के दिन शनि देव पर तेल चढ़ाने के पीछे की वजह चौंका देगी आपको!

नई दिल्ली: शनिवार के दिन शनि देव को तेल चढ़ाने की प्रथा काफी पुरानी मानी जाती है। हिंदू मान्यताओं और शास्त्रो पुराणों में भी इसका उल्लेख किया गया है। तो चलिए आज जानते है कि पुराणों के अनुसार, शनि देव को तेल अर्पित करने का क्या महत्व है? आखिर सभी देवताओं में केवल शनि देव को ही तेल क्यों अर्पित किया जाता है और इस तेल में अपना चेहरा देखने का क्या महत्व है?

दरअसल, शनि देवता को तेल चढ़ाने के पीछे दो कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, शनि देव को अपनी शक्ति और पराक्रम पर बहुत अहम हो गया था, उस काल में ही राम भक्त बजरंगबली के पराक्रम और बल की हर ओर चर्चा होती थी तो जब शनि देव महाराज को इस बात का पता चला तो वो हनुमान जी से युद्ध करने के लिए निकल पड़े, वहां उन्होंने देखा कि हनुमानजी एकांत में बैठकर श्री राम की भक्ति में लीन है। शनिदेव ने हनुमानजी को युद्ध के लिए ललकारा, हनुमान जी ने समझाते हुए कहा कि अभी वो अपने प्रभु श्री राम का ध्यान कर रहे हैं। जिसके बाद हनुमान जी ने शनि देव को जाने के लिए कहा, लेकिन शनि देव उन्हें युद्ध के लिए ललकारते रहे और हनुमानजी के बहुत समझाने पर भी नहीं माने तब हनुमानजी ने फिर से समझाते हुए कहा कि मेरा राम सेतु की परिक्रमा का समय हो रहा है आप कृपया यहां से चले जाइए।

शनि देव के न मानने पर हनुमान जी ने शनि देव को अपनी पूंछ में लपेट लिया और राम सेतु की परिक्रमा शुरु कर दी। शनि देव का पूरा शरीर धरती और रास्ते  में आई चट्टानों से घिसता जा रहा था और उनका पूरा शरीर घायल हो गया। उनके शरीर से रक्त (खून) निकलने लगा और बहुत ज्यादा पीड़ा होने लगी। तब शनिदेव ने हनुमान जी से क्षमा मांगते हुए कहा कि मुझे अपनी उदंडता का परिणाम मिल गया है। कृपया मुझे मुक्त कर दें, तब हनुमान जी ने कहा कि यदि मेरे भक्तों की राशि पर तुम्हारा कोई दुष्परिणाम नहीं होने का वचन दो तो मैं तुम्हे मुक्त कर सकता हूं।

ऐसे में शनि देव ने वचन देते हुए कहा कि आपके भक्तों पर मेरा कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा, तब हनुमानजी ने शनि देव को मुक्त किया और उनके घायल शरीर पर तेल लगाया जिससे शनिदेव को पीड़ा में आराम मिला। तब शनि देव ने कहा कि जो व्यक्ति मुझे तेल अर्पित करेंगे उनका जीवन समृद्ध होगा और मेरे कारण कोई कष्ट नहीं होगा और तबसे ही शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा का प्रारम्भ हुयी।

दूसरी कथा क्या है-

दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार, रावण ने एक बार सभी ग्रहों को अपने अनुसार राशि में बैठाया लेकिन शनि देव ने रावण की बात मानने से मना कर दिया इसलिए रावण ने उन्हें उल्टा-लटका दिया।

इसके बाद हनुमानजी लंका पहुंचे तब रावण ने हनुमान जी की पुंछ में आग लगा दी, हनुमानजी ने उड़ कर सारी लंका को जला दिया। आग लगने के बाद सभी बंदी ग्रह भाग गए परन्तु उल्टा लटका होने के कारण शनिदेव नहीं भाग पाए। शनिदेव की देह में बहुत पीड़ा हो रही थी तब हनुमान जी ने शनि देव को तेल लगाया जिससे शनि देव की पीड़ा कुछ कम हुई इसके पश्चात शनि देव ने कहा कि आज से मुझे तेल अर्पित करने वाले सभी व्यक्तियों की पीड़ा को मैं हर लूंगा। बस तभी से ही शनि देव को तेल अर्पित किया जाने लगा।

तो वहीं मान्यता है कि शनि देव को तेल चढ़ाते समय अगर आप उस तेल में अपना चेहरा देखेंगे तो आपकी राशि में लगे शनि दोषों से आपको मुक्ति मिल जाएगी साथ ही समृद्धि का आगमन होता है।

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