जीवन में हर व्यक्ति यह चाहता है की उसे जीवन में धन वैभव सब प्राप्त हो जाए ,आम तौर पर जब लोग अपनी जन्मपत्री दिखवाने जाते है तो सबसे पहले सवाल ही ये पूछते है की मेरे जीवन में धन वैभव है या नहीं ??
आम तौर किसी भी व्यक्ति की कुंडली का विश्लेषण 9 ग्रह, 12 राशियाँ और 27 नक्षत्रों के आधार पर किया जाता है लेकिन धन वैभव और भोग का कारक शुक्र होता है। कहते है की अगर किसी की कुंडली में शुक्र ग्रह उच्च का होकर अगर केंद्र में बैठ जाए तो उसके वारे न्यारे हो जाते है।
शुक्र ग्रह को ज्योतिष में सौम्य ग्रह माना जाता है और यह स्त्री ग्रह है। अगर पुरुष की कुंडली है तो यह स्त्री का कारक है और अगर स्त्री की कुंडली है तो यह उसके भोग और हार्मोन्स का कारक है।
शुक्र ग्रह 12 भाव की राशि यानी मीन राशि में उच्च का होता है। 12 का भाव भोग का स्थान है और इस भाव की राशि में जाकर शुक्र इंसान को मालामाल करता है। उसे जीवन में ना सिर्फ धनी पत्नी मिलती है बल्कि जीवन भर स्त्रियों के माध्यम से वो फायदा प्राप्त करता है।
अब बात करते है इससे बनने वाले योग की, अगर लग्न, चौथे और दशम भाव में शुक्र तुला या मीन राशि में हो तो ये मालव्य नाम का राजयोग बना देता है। इस योग के प्रभाव से जैसे ही पुरुष का विवाह होता है उसके बाद उसके धन में वृद्धि होती है।
तुला के शुक्र के साथ अगर शनि भी हो तो ऐसी युति परम् राजयोग कारक हो जाएगी और ऐसा व्यक्ति अथाह संपत्ति कमाता है। जीवन में अगर शुक्र कमजोर हो तो ऐसा व्यक्ति सदैव महिलाओं से दूर भागता है और उन्हें आकर्षित नहीं कर पाता है।
अगर शुक्र पाप प्रभाव में हो तो गुप्त रोग भी देता है ,वही मंगल के साथ हो तो एक से अधिक महिला से संबंध बनने के योग होते है। लेकिन अगर यही युति राजयोग बना रही हो तो ऐसा देखा गया है कि इसके फायदे अधिक मिलते है।