देश का “सबसे स्वच्छ शहर” कहलाने वाला इंदौर इन दिनों गंभीर जल प्रदूषण संकट से जूझ रहा है। इंदौर जल-प्रदूषण कांड के बाद सामने आई वॉटर ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार और नगर प्रशासन पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के स्वच्छता और विकसित भारत के दावे ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह फेल साबित हुए हैं।
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भगीरथपुरा सहित इंदौर के कई गरीब और मेहनतकश इलाकों में नलों से दूषित, बदबूदार और सीवेज मिला पानी सप्लाई किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहरी प्रशासन की प्रणालीगत विफलता है। लोग मजबूरी में ज़हरीला पानी पीने को विवश हैं, जिससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय नागरिकों और पत्रकारों के अनुसार, भगीरथपुरा क्षेत्र में अब तक करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में लोगों और मीडिया के प्रवेश को रोकने का प्रयास किया। पुलिस बैरिकेडिंग कर पूरे इलाके को लगभग सील कर दिया गया, जिससे हालात और भी संदेहास्पद हो गए।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई, ताकि सरकार और प्रशासन की जवाबदेही से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना के तहत शोक-संतप्त परिवारों के साथ खड़ी होने के लिए वहां पहुंची थी।
पीड़ित परिवारों में भय और दबाव का माहौल देखा गया। कई लोग खुलकर बोलने से डरते नजर आए। चिंताजनक तथ्य यह है कि कुछ इलाकों में अब भी नलों से वही दूषित पानी सप्लाई हो रहा है। उमंग सिंघार ने कहा कि भगीरथपुरा अकेला मामला नहीं है, बल्कि इंदौर के कई हिस्सों में नागरिक आज भी ज़हरीला पानी पीने को मजबूर हैं।
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, “स्वच्छता के अवॉर्ड से लोग ज़िंदा नहीं रहते। ज़िंदा रहने के लिए साफ़ पानी चाहिए, जो आपकी सरकार इंदौर की जनता को नहीं दे पा रही है।”
जब देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर नागरिकों को साफ़ और सुरक्षित पेयजल तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा, तो स्वच्छता के दावों की सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि मध्य प्रदेश सरकार इस संवेदनशील और गंभीर मामले पर क्या ठोस कदम उठाती है और आम जनता को कब राहत मिलती है।