पन्ना/छतरपुर। आकाशवाणी अपनी स्थापना के 90वें वर्ष और आकाशवाणी केंद्र छतरपुर अपनी स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। इसी क्रम में आकाशवाणी केंद्र छतरपुर द्वारा विशेष काव्य गोष्ठी “रसावरण” का आयोजन किया गया, जिसमें पन्ना जिले के कवियों ने अपनी प्रभावशाली काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया।
इस विशेष काव्य गोष्ठी में पन्ना जिले में पदस्थ आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पाण्डेय ‘चन्दन’, पवई वन परिक्षेत्र अधिकारी नितेश पटेल, रैपुरा वन परिक्षेत्र अधिकारी विवेक जैन तथा रैपुरा के दुर्रा ग्राम निवासी कवि जसवेंद्र सिंह बुंदेला ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन पन्ना के वरिष्ठ कवि सुरेश श्रीवास्तव ‘सौरभ’ ने किया।

सामाजिक सरोकारों से लेकर प्रेम और प्रकृति तक गूंजे स्वर
कवि मुकेश पाण्डेय ‘चन्दन’ ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत “अजन्मी की पुकार” कविता से की, जिसमें कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर सामाजिक विषय को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा उन्होंने प्रेम, विरह और विंध्याचल के जंगलों पर आधारित रचनाओं का भी पाठ किया। नितेश पटेल ने अपनी यथार्थवादी अतुकांत कविताओं के माध्यम से सामाजिक सच्चाइयों और जीवन के विविध पहलुओं को अभिव्यक्त किया। वहीं विवेक जैन ने संघर्षपूर्ण जीवन और घर से दूर रहकर कार्य करने की भावनाओं को कविता के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।कवि जसवेंद्र सिंह बुंदेला ने श्रृंगार रस से परिपूर्ण गीतों के माध्यम से कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भर दिए और श्रोताओं को भावनाओं की अलग दुनिया में पहुंचा दिया।
वीर रस की कविताओं से गूंजा मंच
कार्यक्रम के संचालक और वरिष्ठ कवि सुरेश श्रीवास्तव ‘सौरभ’ ने वीर रस की ओजपूर्ण कविता के माध्यम से देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही उन्होंने अपनी आशु कविता के जरिए आकाशवाणी छतरपुर केंद्र की स्वर्ण जयंती वर्ष पर शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं।
20 जून को होगा प्रसारण
आकाशवाणी छतरपुर केंद्र में रिकॉर्ड किए गए इस विशेष काव्य कार्यक्रम का प्रसारण 20 जून 2026 को प्रातः 10 बजे किया जाएगा। श्रोता इसे आकाशवाणी छतरपुर के मीडियम वेव 675 किलोहर्ट्ज़ पर सुन सकेंगे। इसके अलावा यह कार्यक्रम मोबाइल फोन पर News on AIR App के माध्यम से भी सुना जा सकेगा, जिससे देशभर के श्रोता इस साहित्यिक आयोजन का आनंद ले सकेंगे।आकाशवाणी छतरपुर की इस विशेष काव्य गोष्ठी ने न केवल क्षेत्रीय साहित्यकारों को मंच प्रदान किया, बल्कि बुंदेलखंड की साहित्यिक परंपरा और रचनात्मक प्रतिभाओं को भी नई पहचान दिलाने का कार्य किया है।