ज्योतिष में शनि देव एक महत्वपूर्ण ग्रह है और उनका काम है इंसान को उसके कर्मो का सही फल देना और न्याय देना। आम तौर पर हम लोग शनि से डरते है लेकिन सच्चाई यह है कि ईमानदार और न्यायप्रिय लोगों को शनि देव कतई परेशान नहीं करते है।
शनि देव मेष और वृष राशि के जातकों के लिए योगकारक होते है और कर्क राशि के लिए प्रबल अकारक। तुला राशि उनकी उच्च राशि है वही शत्रु मंगल की राशि मेष में वो नीच के हो जाते है।
शनि देव के बारे में एक बार समझाना बड़ी जरुरी हो जाती है की उनका गोचर सबसे धीमा है तो ऐसे में इंसान को फल मिलने में देरी होना स्वाभाविक है। जैसे की शनि अगर किसी को कोई बीमारी दे रहा है तो उसका पता देर से चलता है।
उसी तरह आप अगर बड़े ईमानदार है और मेहनत से काम कर रहे है लेकिन उसके बाद भी आपको सफलता नहीं मिल रही है तो घबराने की बात नहीं है। शनि का फल कभी भी तत्काल नहीं मिलता है और जब मिलता है तो वो आपकी मेहनत का फल आपको जरूर देते है।
शनि इस संसार में गरीब, मजदुर, नौकर वर्ग के कारक है इसलिए आप अगर शनि देव की कृपा चाहते है तो कभी भी इन लोगों को परेशान मत कीजिए। शनि का सबसे बड़ा पहलु यह है कि शनि ईमानदार है। कर्म शील है। जो कर्म नहीं करता है उसे शनिदेव अपनी दशा में कोई फल नहीं देते है।
आम तौर पर देखा जाता है की जीवन के 32 वर्ष के बाद शनि के शुभ फल मिलना शुरू होते है। अगर एक व्यक्ति ने हमेशा कर्म अच्छा किया है और ईमानदार रहा है तो इस आयु के बाद उसके धन और वैभव में अथाह वृद्धि होती है।
इसलिए आप कर्म करे और ईमानदार रहे। हमेशा गरीब, पीड़ित और मजदुर लोगों का सम्मान करे और उनकी सेवा करे। ऐसा करने से शनि देव के अशुभ फल आपको नहीं मिलेंगे।