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चंद्रमा की किरणों से बरसता है अमृत जब होती है शरद पूर्णिमा की रात : पढ़िए

By: RNI Hindi Desk 
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चंद्रमा की किरणों से बरसता है अमृत जब होती है शरद पूर्णिमा की रात : पढ़िए

वैसे तो साल में 12 पूर्णिमा आती है लेकिन आश्विन माह की पूर्णिमा कुछ खास होती है। दरअसल इस दिन माना जाता है कि चांद से निकलने वाले किरणें अमृत के तरह होती है। मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा वाली रात को खीर बनाकर चांद की रोशनी में पूरी रात रखा जाता है।

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है। पूर्णिमा तिथि का स्वामी भी स्वयं चंद्रमा ही है। दरअसल चांद की रोशनी में औषधीय गुण होते हैं जिसमें कई असाध्य रोगों को दूर करने की क्षमता होती है।

शरद पूर्णिमा को खीर को रात भर चांद की रोशनी में रखने के बाद खाने की परम्परा है। रातभर इसे चांदनी में रखने से इसकी तासीर बदलती है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। कहा जाता है कि इसे चांदी के बर्तन में रखना चाहिए क्यूंकि चांदी की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है।

इस दिन रात्रि में प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। रात्रि 10 से 12 बजे तक का समय उपयुक्त रहता है। इसके अलावा ऐसा मानते हैं कि इस दिन देवी लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर बैठकर भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी का भ्रमण करने आती हैं।

इस दिन लोग सारी रात जागकर श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते है और इसलिए इसे जागृति पूर्णिमा भी कहा जाता है। पूर्णिमा की रात में जिस भी चीज पर चंद्रमा की किरणें गिरती हैं उसमें अमृत का संचार होता है।

इसी खीर को जब रात भर चन्द्रमा की किरणों में रखा जाता है और उसके बाद जब इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता है इससे शरीर के रोग भी नष्ट हो जाते है। इस साल 30 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 47 मिनट से पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो जाएगा और 31 अक्टूबर रात 8 बजकर 21 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी।

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