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रामायण में भी माता सीता ने की थी छट पूजा : जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

By RNI Hindi Desk 
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कार्तिक माह हिन्दू धर्म के लिए बेहद ख़ास है। एक सप्ताह तक चलने वाले दीपोत्सव के बाद छट पूजा का पर्व आता है। यह पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की छटी तिथि को मनाया जाता है।

इस वर्ष छठ पर्व की पूजा 20 नवंबर दिन शुक्रवार को की जाएगी। बिहार में यह पर्व विशेषतौर पर बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार संतान और गृहस्थ सुख की कामना से इस व्रत को किया जाता है।

इस व्रत को करने के कुछ नियम भी है ! जैसे षष्ठी तिथि से दो दिन पहले यानि चतुर्थी से नहाय-खाय से आरंभ हो जाता है और इसका समापन सप्तमी तिथि को पारण करके किया जाता है। छठ पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है।

षष्ठी तिथि को भगवान् सूर्य नारायण की सेवा पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का विधान है।

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पूजा का आरंभ होता है। इस दिन को नहाय-खाय की परंपरा होती है। इस साल 18 नवंबर दिन बुधवार 2020 को नहाय-खाय का दिन रहेगा।

पौराणिक कथाओं के अनुसार 14 वर्ष वनवास के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूय यज्ञ करने का फैसला लिया।

इसके लिए मुग्दल ऋषि को आमंत्रण दिया गया था, लेकिन मुग्दल ऋषि ने भगवान राम एवं सीता को अपने ही आश्रम में आने का आदेश दिया।

ऋषि की आज्ञा पर भगवान राम एवं सीता स्वयं यहां आए और उन्हें इसकी पूजा के बारे में बताया गया।

मुग्दल ऋषि ने मां सीता को गंगा छिड़क कर पवित्र किया एवं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। यहीं रह कर माता सीता ने छह दिनों तक सूर्यदेव की पूजा की थी।

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