गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के लिए 3 अक्टूबर का दिन विवादों से भरा रहा प्रेस क्लब में पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी के साथ मारपीट और थप्पड़ कांड के बाद पार्टी ने अंशुमान सिंह के खिलाफ कार्रवाई की और अब 4 अक्टूबर को सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने गोरखपुर संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। जिला अध्यक्ष समेत जिला कार्यकारिणी, महानगर अध्यक्ष और महानगर कार्यकारिणी के साथ-साथ फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
थप्पड़ कांड के अगले ही दिन संगठन भंग
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति से जारी इस कार्यालय-ज्ञाप में गोरखपुर के जिला अध्यक्ष समेत पूरी जिला कार्यकारिणी और महानगर अध्यक्ष समेत महानगर कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग करने की बात कही गई है। इसके साथ ही पार्टी के फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणियों को भी भंग कर दिया गया है। खास बात ये है कि यह फैसला ऐसे वक्त आया है, जब महज एक दिन पहले यानी 3 अक्टूबर को गोरखपुर प्रेस क्लब में समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी नेताओं के बीच विवाद हुआ था। बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद कहासुनी और फिर मारपीट तक पहुंच गया था। पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी के साथ मारपीट और थप्पड़ मारे जाने का आरोप लगा था। इसके बाद पार्टी ने अंशुमान सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया था।

क्या थप्पड़ कांड के बाद संगठन पर गिरी गाज?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रेस क्लब में हुआ विवाद और उसके बाद सामने आई तस्वीरों ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को गोरखपुर संगठन पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया? हालांकि, पार्टी के 4 अक्टूबर के इस कार्यालय-ज्ञाप में संगठन भंग करने की वजह के तौर पर प्रेस क्लब की घटना का सीधे तौर पर कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इसे थप्पड़ कांड की सीधी कार्रवाई कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन घटनाक्रम की टाइमिंग जरूर कई सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ 3 अक्टूबर को प्रेस क्लब में पार्टी के भीतर सार्वजनिक तौर पर विवाद और मारपीट हुई उसी दिन अंशुमान सिंह पर कार्रवाई हुई और अब अगले ही दिन गोरखपुर की जिला और महानगर इकाइयों समेत फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियां भंग कर दी गईं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को प्रेस क्लब विवाद के बाद संगठन के भीतर अनुशासन और नेतृत्व को लेकर उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब नए सिरे से संगठन खड़ा करेगा सपा नेतृत्व
यानी गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के भीतर बड़ा संगठनात्मक बदलाव सामने आया है। अब निगाह इस बात पर है कि पार्टी नया जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष किसे बनाती है और नई जिला व महानगर कार्यकारिणी में किन चेहरों को जगह मिलती है। कुल मिलाकर, प्रेस क्लब का थप्पड़ कांड, अंशुमान सिंह पर करवाई और अब गोरखपुर के पूरे संगठन का भंग होना इन घटनाओं ने गोरखपुर की सपा की अंदरूनी सियासत को अचानक सुर्खियों में ला दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या यह सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल है या फिर प्रेस क्लब विवाद के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व ने गोरखपुर में पूरी टीम को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला किया है?
अंकित श्रीवास्तव की रिपोर्ट