सिंगरौली। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कलेक्टर **गौरव बैनल** ने दिव्यांगजनों के साथ बैठक कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि दिव्यांगजनों की योग्यता और रुचि के अनुसार उन्हें एकल एवं समूह स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए सीएसआर मद का उपयोग किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) के माध्यम से ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग सहित विभिन्न कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बन सकें।
बैठक में रीहैबिलिटेशन विशेषज्ञ द्वारा बताया गया कि सामाजिक न्याय विभाग और साइनएबल कम्युनिकेशंस, बेंगलुरु के बीच हुए एमओयू के तहत प्रशासनिक संस्थानों में विशेष ‘संवाद-सहायता’ क्यूआर कोड लगाए जाएंगे।
इन क्यूआर कोड को स्कैन करने पर सांकेतिक भाषा अनुवादक से सीधा संपर्क स्थापित होगा, जिससे मुखबाधिर दिव्यांगजन और अधिकारी आसानी से संवाद कर सकेंगे। कलेक्टर ने स्वयं क्यूआर कोड स्कैन कर प्रणाली का अवलोकन किया और इसे प्रशासनिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के सभी सरकारी कार्यालयों और पुलिस थानों में यह सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए।

कलेक्टर ने बताया कि बरगवां-ढ़ेकी स्थित दिव्यांग विद्यालय को पुनः संचालित किया जाएगा। इस विद्यालय में बीएड प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इसके साथ ही विद्यालय परिसर का कायाकल्प कर वहीं पर आवासीय (बोर्डिंग) व्यवस्था विकसित करने की योजना भी बनाई गई है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी शिक्षा से वंचित न रहें।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को जिले के मुखबाधिर दिव्यांग बच्चों का सर्वे करने और उन्हें विद्यालय में प्रवेश के लिए चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और सभी को समान अवसर प्राप्त हों।