नौ ग्रहों में से शनिदेव सबसे धीमे ग्रह है और मकर, कुम्भ राशियों के ये स्वामी है। चंद्रमा जहां एक राशि में ढाई दिन ही रहता है वही शनि एक राशि में ढाई साल तक रहते है और यही कारण है की इनका गोचर सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है।
आपको बता दे कि शनि देव की साढ़े साती और ढैया का काल काफी कष्टप्रद हो जाता है अगर आपकी कुंडली में शनि अशुभ हो। इसके अलावा जो लोग आलसी होते है और मेहनत नहीं करते उनको तो शनि और बुरे फल देता है।
शनि देव को खुश करने के लिए मंत्र जाप किया जाता है वहीं हनुमान जी की साधना को भी काफी फलप्रद माना गया है। दूसरे उपाय के तौर भी शनि से सम्बंधित वस्तुओं का दान भी किया जाता है।
अगर वार की बात की जाए तो शनिवार पर शनि देव का प्रभाव होता है। इसलिए इस दिन के लिए भी कुछ उपाय बताए गए है। माना जाता है की इस दिन पीपल की पेड़ की जड़ में सरसों का तेल का दिया जलाना चाहिए।
इसके अलावा हो सके तो हनुमान जी के मंदिर में बैठकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा कुछ ऐसी वस्तुऐं भी है जिनको शनिवार के दिन नहीं खरीदना चाहिए।
उदाहरण के लिए नमक, इसके बिना खाना स्वादिष्ट नहीं बनता है लेकिन माना जाता है की शनिवार के दिन नमक नहीं खरीदना चाहिए। इसके अलावा शनि का वास लोहे में माना गया है। इसी कारण लोहा नहीं खरीदना चाहिए।
इस दिन आप चाहे तो लोहे का दान करिए लेकिन उसे खरीदिए मत। इसके अलावा मांस और मदिरा का सेवन भी इस दिन बेहद कष्टकारक माना गया है। जो भी इस दिन मांस मदिरा का सेवन करता है उसे शनि के अशुभ फल ही प्राप्त होते है।