रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: आचार्य चाणक्य का नाम आते ही लोगो में विद्वता आनी शुरु हो जाती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति और विद्वाता से चंद्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठा दिया था। इस विद्वान ने राजनीति,अर्थनीति,कृषि,समाजनीति आदि ग्रंथो की रचना की थी। जिसके बाद दुनिया ने इन विषयों को पहली बार देखा है। आज हम आचार्य चाणक्य के नीतिशास्त्र के उस नीति की बात करेंगे, जिसमें उन्होने बताया है कि सेहतमंद रहना है तो इस औषधि को हमेशा अपने पास रखें।
गुरच औषधि सुखन में भोजन कहो प्रमान।
चक्षु इंद्रिय सब अंश में, शिर प्रधान भी जान।।
आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक के माध्यम से अपनी नीति शास्त्र में गुरच यानी गिलोय के गुणों का बखान किया है। इसे सर्वश्रेष्ठ औषधि बताया है। श्लोक में आचार्य कहते हैं कि औषधियों में गुरच सर्वश्रेष्ठ है और सभी सुखों में भोजन परम सुख होता है। सभी इंद्रियों में आंखें सबसे महत्वपूर्ण हैं और मस्तिष्क सबसे प्रमुख है। इसलिए सेहतमंद भोजन करें, गुरच का सेवन करें, आंखों का खयाल रखें और दिमाग को तनावमुक्त रखें।
राग बढत है शाकते, पय से बढत शरीर।
घृत खाये बीरज बढे, मांस मांस गम्भीर।।
इसके बाद आचार्य ने इस श्लोक के माध्यम से बताया है कि शाक खाने से रोग बढ़ते हैं और दूध पीने से शरीर बलवान होता है। घी खाने से वीर्य में वृद्धि होती है और मांस आपके शरीर में मांस को ही बढ़ाता है।
चूर्ण दश गुणो अन्न ते, ता दश गुण पय जान।
पय से अठगुण मांस ते तेहि दशगुण घृत मान।।
आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक के माध्यम से कहा हैं कि खड़े अनाज की तुलना में पिसा हुआ अन्न 10 गुना ज्यादा पौष्टिक होता है। पिसे अन्न से दस गुना ज्यादा पौष्टिक दूध होता है। दूध से आठ गुना पौष्टिक मांस होता है और मांस से भी 10 गुना पौष्टिक घी होता है।