वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह और बारह भाव से मनुष्य के पूरा जीवन देखा जाता है। हर ग्रह और हर भाव जीवन के एक हिस्से को दर्शाता है। आज हम बात करने वाले है सर्दी खांसी जुकाम की जो की एक आम समस्या है।
ज्योतिष में मनुष्य के पुरे शरीर के अंगों का वर्णन है और हर अंग का एक प्रधान भाव और ग्रह है। अगर हमें ये देखना है की मनुष्य को कौनसा रोग जल्दी होगा या किस बीमारी से वो पीड़ित है तो उसके लिए छटे भाव को, उसके स्वामी को और उसके कारण ग्रह मंगल को देखा जाता है।
इसके अलावा हर ग्रह किसी ना किसी बीमारी को भी दर्शाता है और उस ग्रह के कमजोर होने पर वो बीमारी भी मनुष्य को होने के चांस रहते है लेकिन कब होगी इसका निर्णय दशा अंतर्दशा के हिसाब से लिया जाता है।
इसी कड़ी में आज हम बात करते है सर्दी जुकाम की, ज्योतिष में चन्द्रमा एक स्त्री ग्रह है और ये जल का कारक है। जल के कारण होने वाले इन्फेक्शन का कारक भी चंद्रमा को ही माना जाता है।
जितने भी वायु रोग होते है या कफ के कारण जो बीमारी होती है उसका कारण चन्द्रमा ही है। जिसकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या पाप ग्रह से पीड़ित हो तो ऐसा व्यक्ति जल्दी ही एलर्जी और इन्फेक्शन का शिकार होता है। अगर चन्द्रमा उच्च राशि में हो या राजयोग बना रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को जल्दी से एलर्जी नहीं होती है।
कोई भी निर्णय नहीं ले पाना, मन में भय, माँ की बीमारी, जल्दी से बीमार होना, घर में धन का प्रवाह रुक जाना ये सब कमजोर चंद्र के लक्षण है।
अगर ऐसा है तो महादेव की सेवा करनी चाहिए। चंद्र के नक्षत्र में शिव का अभिषेक करना चाहिए। मोती भी धारण कर सकते है लेकिन उसके पहले किसी अच्छे ज्योतिषी को अपनी कुंडली जरुर दिखवा ले।