Home भाग्यफल सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के इन देशों में भी मनायी जाती है होली, जानिएं उनकी मान्यता और परंपरा…

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के इन देशों में भी मनायी जाती है होली, जानिएं उनकी मान्यता और परंपरा…

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रिपोर्ट: गीतांजली लोहनी

नई दिल्ली: भारत एक ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के लोग रहते है यहां अनेक प्रकार की जातियां है अनेक प्रकार के रीति रिवाज , खान–पान, रहन-सहन, तीज- त्योहार सभी कुछ यहां बहुत ही अनोखा और बहुत ही बेहतरीन तरीके से मनाया जाता है। ऐसे ही अब रंगो का त्योहार होली भी नजदीक आ रहा है, जिसमें सभी लोग ऊंच-नीच, जाति-धर्म की दीवार तोड़कर बस रंगो के रंग में घुल जाने को तैयार है। भारत में बड़े ही प्यार और हर्षोल्लास से होली का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि होली सिर्फ भारत ही  नहीं बल्कि अन्य देशों में मनायी जाती है। हां मगर इन देशों में भारत की तरह नहीं पर इससे मिलता-जुलता त्योहार मनाया जाता है। जिसकी मान्याएं और परंपरा तो अलग होती है मगर उद्देश्य सभी का एक ही होता है। तो चलिए जानते है भारत देश के अलावा और किस देश में मनाया जाता है होली का त्योहार-

अमेरिका

दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में होली का त्योहार हैलोईन नाम से हल साल 31 अक्टूबर की रात को मनाया जाता है। इस त्योहार में बच्चों की टोलियां सूर्यास्त के बाद खेलने-कूदने और मस्ती करने के लिए जमा हो जाती है।

फ्रांस

फ्रांस के नारमंडी नामक स्थान में घास से बनी हुई मूर्ति को शहर में घुमाकर गाली तथा भद्दे शब्द बकते हुए आग लगा देते हैं। बच्चे हो-हल्ला करते हुए इसके चक्कर लगाते हैं। ये भी होली की तरह सभी को एक साथ बांधने का त्योहार माना जाता है।

जर्मनी

ईस्टर के समय में पेड़ों को काटकर गाड़ दिया जाता है। उसके चारों ओर लकड़ी व घास का ढेर लगा देते हैं और उसमें आग लगा देते हैं। उस समय एक-दूसरे के मुंह पर रंग लगाते हैं और कपड़ों पर ठप्पा लगाकर हंसते हैं। जर्मनी में भारत की तरह मिलता-जुलता होलिका दहन और होली का त्योहार इसे माना जाता है।

ईटली

ईटली में यह उत्सव फरवरी में रेडिका के नाम से मनाया जाता है। शाम को लोग तरह-तरह की वेश-भूषा में कार्निवल की मूर्ति को एक रथ में बैठाकर, गाते-बजाते जुलूस के रूप में निकलते हैं। यह जुलूस नगर के प्रमुख चौराहों से गुजरता हुआ शहर के मुख्य चौक पर पहुंचता है। वहां इकट्ठी की हुई सुखी लकडिय़ों को इस रथ में खड़ा करके इसमें आग लगा दी जाती है। इसके बाद सभी गाते व नाचते हैं।

साइबेरिया

ग्रीष्म ऋतु के आगमन से पूर्व बालक घर-घर जाकर लकडिय़ां इकट्ठी करते हैं और आग लगा देते हैं। स्त्री-पुरुष एक-दूसरे का हाथ पकड़कर तीन बार अग्नि की परिक्रमा कर उसको लांघते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से वर्ष भर बुखार नहीं आता।

स्वीडन-नार्वे

सैंट जॉन की पवित्र तिथि पर लोग इकट्ठे होकर अग्नि क्रीड़ा महोत्सव करते हैं। शाम को किसी प्रमुख स्थान पर आग जलाकर लोग नाचते-गाते हैं और इसकी परिक्रमा करते है।

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