खंडवा के युवा फिल्मकार सुदीप सोहनी ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से एक बार फिर मध्य प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है। उनकी लघु फिल्म ‘जग्गू और मागाहारी’ का यूरोपियन प्रीमियर जर्मनी के प्रतिष्ठित स्टुटगार्ट इंडियन फिल्म फेस्टिवल में होने जा रहा है। 23 से 26 जुलाई तक आयोजित होने वाले इस फिल्म महोत्सव में 25 जुलाई को स्टुटगार्ट के इनेनस्टेडकिनोस सिनेमा में सुबह 11 बजे फिल्म का प्रदर्शन किया जाएगा। फिल्म के प्रदर्शन के बाद निर्देशक सुदीप सोहनी दर्शकों के साथ विशेष संवाद भी करेंगे।
इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में मध्य प्रदेश से चयनित होने वाली ‘जग्गू और मागाहारी’ एकमात्र फिल्म है। फिल्मब्यूरो बेडन-वुर्टेमबर्ग द्वारा आयोजित यह महोत्सव यूरोप में भारतीय सिनेमा के प्रमुख आयोजनों में शामिल है, जिसका आयोजन वर्ष 2004 से लगातार किया जा रहा है।
करीब 25 मिनट लंबी यह फिल्म गढ़वाली और हिंदी भाषा में बनाई गई है। फिल्म की कहानी आठ वर्षीय बच्चे जग्गू के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका पालतू खरगोश अचानक गायब हो जाता है। अपने पिता को टिफिन पहुंचाने के दौरान उसकी मुलाकात पहाड़ों में आए एक अनजान शहरी व्यक्ति से होती है। इसके बाद दोनों के बीच विकसित होने वाला रिश्ता पहाड़ी जीवन की चुनौतियों, बचपन की मासूमियत और मानवीय संवेदनाओं को बेहद सरल तरीके से दर्शाता है।
सुदीप सोहनी का जन्म खंडवा में हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा शहर के सरस्वती शिशु मंदिर, कल्याणगंज और शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (FTII), पुणे से फिल्म निर्माण की शिक्षा प्राप्त की। फिल्म निर्माण से पहले उन्होंने मुंबई की कई प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों के साथ काम किया। उन्होंने अभिनेता दिलीप जोशी और दिशा वाकानी के साथ आई डोनेशन जागरूकता अभियान का निर्देशन भी किया।
सुदीप सोहनी इससे पहले खंडवा जिले के कालमुखी गांव पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘यादों में गणगौर’ बना चुके हैं। यह फिल्म अमेरिका के प्रतिष्ठित ओटीटी प्लेटफॉर्म हेरिटेज पर प्रदर्शित हो चुकी है। इसके साथ ही वह इस मंच पर अंतरराष्ट्रीय वितरण हासिल करने वाले मध्य प्रदेश के पहले और एकमात्र फिल्मकार बने।

सुदीप सोहनी के अनुसार, ‘जग्गू और मागाहारी’ का विचार वर्ष 2017 में आया था। इसकी कहानी भोपाल की लेखिका श्वेता बिसेन ने लिखी थी। कहानी की पृष्ठभूमि को देखते हुए फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड में गढ़वाली भाषा के परिवेश में की गई। फिल्म में हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेता वीरेंद्र सक्सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुदीप बताते हैं कि FTII में अध्ययन के दौरान उन्हें ईरानी सिनेमा और बच्चों पर आधारित फिल्मों से काफी प्रेरणा मिली थी।
जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आयोजित कलकत्ता चिल्ड्रन्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म का भारतीय प्रीमियर हुआ था। इसके बाद नई दिल्ली, लखनऊ और भोपाल के कई प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में भी इसका प्रदर्शन किया जा चुका है, जहां इसे दर्शकों और समीक्षकों की सराहना मिली।
सुदीप सोहनी स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन अवॉर्ड्स की जूरी का हिस्सा भी रह चुके हैं। वह देश के कई फिल्म संस्थानों में फिल्म निर्माण और पटकथा लेखन से जुड़ी कार्यशालाओं में योगदान दे चुके हैं। वर्तमान में भोपाल में रहकर वह फिल्म निर्माण के साथ-साथ ‘सिनेकारी’ मंच के माध्यम से मध्य प्रदेश के सिनेमा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।
खंडवा और मध्य प्रदेश के लिए गर्व का पल
जर्मनी के प्रतिष्ठित मंच पर ‘जग्गू और मागाहारी’ का प्रदर्शन सुदीप सोहनी की व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ खंडवा और पूरे मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह सफलता प्रदेश के नए फिल्मकारों को वैश्विक मंच तक पहुंचने के लिए प्रेरणा देने वाली है।