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मां विंध्यवासिनी के दरबार पहुंचें शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, महानवमी पर मांगा आशीर्वाद

शारदीय नवरात्रि की महानवमी के अवसर पर बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सह बैकुंठपुर विधायक मिथिलेश तिवारी उत्तर प्रदेश विंध्याचल धाम पहुंचे, जहां उन्होंने मां विंध्यवासिनी की विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

By: Nivedita 
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मां विंध्यवासिनी के दरबार पहुंचें शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, महानवमी पर मांगा आशीर्वाद

शारदीय नवरात्रि की महानवमी के अवसर पर देशभर में श्रद्धालुओं का हुजूम देखने के मिल रहा है। मां के शक्तिपीठों और मंदिरों में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है। कोसों दूर से भक्तजन मां का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरों के बाहर कतारें लगाएं खड़ें हैं। इसी दौरान बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सह बैकुंठपुर विधायक मिथिलेश तिवारी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित विंध्याचल धाम पहुंचे। यहां उन्होंने मां विंध्यवासिनी की विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। शिक्षा मंत्री ने बिहार सहित पूरे देश में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

मिथिलेश तिवारी ने मां के दरबार में टेका मत्था

महानवमी के पावन अवसर पर विंध्याचल धाम में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का माहौल देखने को मिला। इसी क्रम में बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मां विंध्यवासिनी के दरबार में पहुंचकर पूजन-दर्शन किया।

जनकल्याण की प्रार्थना की

मां भगवती के चरणों में शीश नवाकर उन्होंने प्रदेश की तरक्की, जनता की खुशहाली और जनकल्याण की प्रार्थना की। साथ ही जनसेवा के अपने संकल्प को मजबूत करने और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का आशीर्वाद मांगा। महानवमी पर पूरा विंध्याचल धाम मां के जयकारों से गूंजता रहा और माहौल भक्तिमय बना रहा।

 

 

माँ विंध्यवासिनी धाम

यह मंदिर मिर्ज़ापुर शहर से लगभग 8 किमी, वाराणसी से करीब 65-70 किमी और प्रयागराज से 90 किमी दूर स्थित है। यह आदि शक्ति मां विंध्यवासिनी का निवास स्थान है, जिन्हें महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती का समन्वित स्वरूप माना जाता है। यहाँ की प्रसिद्ध ‘त्रिकोण यात्रा’ में माँ विंध्यवासिनी के साथ माँ काली खोह और माँ अष्टभुजा के दर्शन भी किए जाते हैं। माँ विंध्यवासिनी के मंदिर में प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से रात 11:30 बजे तक दर्शन होते हैं। मंगला आरती सुबह 4:00 बजे और अन्य विशेष आरती (भोग, संध्या, श्रृंगार, शयन) नियत समय पर होती हैं।

दर्शन के लिए कैसे पहुंचे?

  • विंध्याचल रेलवे स्टेशन (BDL)

यह मंदिर से केवल 1 किलोमीटर दूर स्थित है। दिल्ली-हावड़ा और मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर होने के कारण यहाँ कई ट्रेनें रुकती हैं। स्टेशन से पैदल, ऑटो या रिक्शा लेकर मंदिर पहुँच सकते हैं।

  • मिर्जापुर रेलवे स्टेशन (MZP)

यदि आपकी ट्रेन विंध्याचल स्टेशन पर नहीं रुकती, तो आप मिर्जापुर स्टेशन पर उतर सकते हैं। यह मंदिर से करीब 9 किलोमीटर दूर है, जहाँ से टैक्सी या ऑटो आसानी से मिल जाते हैं।

  • सड़क मार्ग द्वारा

वाराणसी से दूरी लगभग 63 से 70 किलोमीटर का सफर है। इसके अलावा ड्राइव करके पहुँचने में डेढ़ से दो घंटे लगते हैं। वहीं, प्रयागराज से दूरी मंदिर पहुंचने में लगभग 85 किलोमीटर का समय तय होता है।

  • राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 2)

दिल्ली-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 2) पर प्रयागराज और वाराणसी के बीच गोपीगंज या औराई से मुड़कर शास्त्री पुल और स्टेट हाईवे 5 के माध्यम से विंध्याचल पहुँचा जा सकता है। वहीं, बस सेवा के लिए उत्तर प्रदेश राज्य                सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसें वाराणसी और प्रयागराज से नियमित रूप से उपलब्ध हैं।

 

रिपोर्ट – नमो नारायण मिश्रा

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