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प्रियागोल्ड बिस्किट में पशु चारे का चोकर इस्तेमाल करने का आरोप, डोडला डेयरी के दूध में डिटर्जेंट मिलने पर FSSAI का एक्शन

FSSAI ने प्रियागोल्ड बिस्किट, डोडला डेयरी के दूध और UEIR ऑर्गेनिक फूड्स की किशमिश में कथित गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ियों को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। जांच में बिस्किट में पशु चारे के चोकर, दूध के एक नमूने में डिटर्जेंट व कास्टिक सोडा और किशमिश में अधिक कीटनाशक अवशेष मिलने की बात सामने आई।

By: Nivedita 
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प्रियागोल्ड बिस्किट में पशु चारे का चोकर इस्तेमाल करने का आरोप, डोडला डेयरी के दूध में डिटर्जेंट मिलने पर FSSAI का एक्शन
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अक्टूबर 2026 में तीन कंपनियों के खिलाफ अभियोजन संबंधी कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इनमें प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड, डोडला डेयरी लिमिटेड और यूईआईआर ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। नियामक की जांच में बिस्किट के निर्माण में पशु चारे के लिए निर्धारित चोकर के इस्तेमाल, दूध के एक नमूने में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा की मौजूदगी तथा किशमिश में तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष मिलने की बात सामने आई। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि संबंधित कंपनियां बिस्किट, दूध और अन्य खाद्य उत्पादों के बाजार में कारोबार करती हैं। आइए जानते हैं कि जांच में क्या सामने आया, कंपनियों का इतिहास क्या है, इन्हें किसने स्थापित किया और इनके कारोबार का आकार कितना है।

प्रियागोल्ड बिस्किट में पशु चारे का चोकर इस्तेमाल करने का आरोप, डोडला डेयरी के दूध में डिटर्जेंट मिलने पर FSSAI का एक्शन

FSSAI के मुताबिक, एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली कंपनी सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड के विनिर्माण संयंत्र का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान बिस्किट में फाइबर के स्रोत के रूप में ऐसा चोकर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई, जिसे पशु चारे के लिए निर्धारित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, चोकर की बोरियों पर भी यह उल्लेख था कि सामग्री पशुओं के चारे के लिए है, मानव उपभोग के लिए नहीं। निरीक्षण में संयंत्र की साफ-सफाई, कीट नियंत्रण, कच्चे माल के भंडारण, कर्मचारियों की स्वच्छता और उत्पादन प्रक्रिया से जुड़ी अन्य कमियां भी दर्ज की गईं। FSSAI इससे पहले गंभीर अनियमितताओं के कारण कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर चुका था। अब कंपनी के खिलाफ अभियोजन संबंधी कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है। इसका अर्थ है कि मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा रहा है; इसे अंतिम न्यायिक दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।

2. प्रियागोल्ड कंपनी कब बनी, मालिक कौन हैं और कितना है टर्नओवर?

प्रियागोल्ड बिस्किट ब्रांड का संचालन सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड (Surya Food & Agro Ltd.) करती है। कंपनी के आधिकारिक परिचय और कॉर्पोरेट रिकॉर्ड के अनुसार, इसकी स्थापना का इतिहास 1990 के दशक की शुरुआत से जुड़ा है।
* कंपनी की स्थापना: 1992 में कॉर्पोरेट पंजीकरण; कंपनी के आधिकारिक ब्रांड परिचय में 1994 में स्थापना का उल्लेख है।
* संस्थापक: बल्लभ प्रसाद अग्रवाल और उनके बेटे मनोज कुमार अग्रवाल, नवीन कुमार अग्रवाल तथा शेखर अग्रवाल।
* प्रमुख कारोबारी: मनोज अग्रवाल, नवीन अग्रवाल और शेखर अग्रवाल।
* मुख्यालय: नोएडा, उत्तर प्रदेश।
* प्रमुख उत्पाद: बिस्किट, कुकीज, केक, चॉकलेट, कन्फेक्शनरी और पेय पदार्थ।
* ब्रांड: Priyagold, Butter Bite, CNC, Snacks Zig Zag और Marie Lite।

प्रियागोल्ड का टर्नओवर कितना है?

उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग ₹2,074 करोड़ का राजस्व दर्ज किया। वहीं, क्रिसिल की जनवरी 2025 की रिपोर्ट में पूरे सूर्या समूह का वित्त वर्ष 2025 का राजस्व लगभग ₹2,100–2,200 करोड़ रहने का अनुमान दिया गया था। दोनों आंकड़ों का आधार अलग हो सकता है, इसलिए इन्हें एक ही वित्तीय आंकड़ा नहीं समझना चाहिए। कंपनी का कारोबार केवल बिस्किट तक सीमित नहीं है। इसके उत्पादों की विभिन्न श्रेणियां और पैकेजिंग सामग्री के कारोबार से जुड़ी समूह कंपनियां भी हैं। इसलिए कंपनी की वित्तीय स्थिति को समझते समय अकेले प्रियागोल्ड ब्रांड और पूरे समूह के राजस्व में अंतर करना जरूरी है।

3. डोडला डेयरी के दूध में क्या मिला?

FSSAI की रिपोर्ट के मुताबिक, डोडला डेयरी के फुल क्रीम दूध का एक नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। शुरुआती जांच में दूध में वसा की मात्रा तय न्यूनतम स्तर से कम मिली। कंपनी की अपील के बाद नमूने को रेफरल फूड लैबोरेटरी भेजा गया। वहां जांच में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा की मौजूदगी की पुष्टि हुई। दूध में वसा की मात्रा भी निर्धारित न्यूनतम सीमा से कम पाई गई। नियामक ने नमूने को असुरक्षित और घटिया गुणवत्ता वाला मानते हुए अभियोजन संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ाने की मंजूरी दी। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह निष्कर्ष संबंधित जांच किए गए नमूने के बारे में है। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि कंपनी के सभी दूध उत्पादों में डिटर्जेंट मौजूद है।

प्रियागोल्ड बिस्किट में पशु चारे का चोकर इस्तेमाल करने का आरोप, डोडला डेयरी के दूध में डिटर्जेंट मिलने पर FSSAI का एक्शन

4. डोडला डेयरी की स्थापना, मालिक और टर्नओवर

डोडला डेयरी लिमिटेड दक्षिण भारत की प्रमुख डेयरी कंपनियों में शामिल है। कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इसका पंजीकरण 1995 में हुआ और व्यावसायिक उत्पादन 1998 में शुरू हुआ। इसका मुख्यालय हैदराबाद, तेलंगाना में है।
* स्थापना: 1995
* उत्पादन की शुरुआत: 1998
* प्रमुख कारोबारी नेतृत्व: डोडला सुनील रेड्डी, प्रबंध निदेशक
* अन्य प्रमुख निदेशक: डोडला शेषा रेड्डी
* मुख्यालय: हैदराबाद, तेलंगाना
* कारोबार: दूध, दही, घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पाद।

डोडला डेयरी का सालाना कारोबार

कंपनी की वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में निम्न आंकड़े दर्ज हैं:
वित्तीय विवरण                                         राशि
परिचालन से समेकित राजस्व                  ₹3,720.07 करोड़
कुल समेकित आय                                  ₹3,773.36 करोड़
कर के बाद समेकित मुनाफा                   ₹259.93 करोड़
ये आंकड़े पूरे डोडला समूह के समेकित वित्तीय परिणाम हैं, केवल दूध के कारोबार के नहीं।

5. तीसरी कंपनी UEIR Organic Foods के खिलाफ भी कार्रवाई

FSSAI की कार्रवाई केवल बिस्किट और दूध तक सीमित नहीं रही। नियामक के अनुसार, UEIR Organic Foods प्राइवेट लिमिटेड की पीली किशमिश के नमूने में भी निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए गए।
रेफरल प्रयोगशाला की जांच में थायमेथोक्सम और फ्लुओपायरम के मेटाबोलाइट्स की अधिक मात्रा सामने आई। इसके बाद कंपनी के खिलाफ भी अभियोजन संबंधी कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दी गई।

6. FSSAI क्या है और कंपनियों पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI देश में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मानकों को लागू करने वाला नियामक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है, जुर्माना लगाया जा सकता है और गंभीर मामलों में अभियोजन चलाया जा सकता है। इस मामले में सूर्या फूड एंड एग्रो का लाइसेंस पहले निलंबित किया गया था और अब अभियोजन संबंधी कार्रवाई शुरू की गई है। डोडला डेयरी और UEIR Organic Foods के मामलों में भी नियामक ने कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाई है। अंतिम कानूनी परिणाम संबंधित प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण के फैसले पर निर्भर करेंगे।

7. उपभोक्ताओं के लिए इस मामले का क्या मतलब है?

यह मामला खाद्य पदार्थों के निर्माण, कच्चे माल की गुणवत्ता, स्वच्छता और प्रयोगशाला जांच की अहमियत को सामने लाता है। उपभोक्ताओं को पैकेट पर निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, बैच नंबर, FSSAI लाइसेंस नंबर और पैकेजिंग की स्थिति की जांच करनी चाहिए। यदि किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो उसका पैकेट और बिल सुरक्षित रखें तथा संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग या FSSAI के शिकायत माध्यम से जानकारी दें।
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