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सासाराम के शिव घाट मंदिर में राम नाम लिख रहे 800 बच्चे, एकाग्रता और अच्छे विचारों पर जोर

बिहार के सासाराम स्थित शिव घाट मंदिर में करीब 800 बच्चे राम नाम लेखन से जुड़े हैं। प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 7 बजे तक चलने वाली इस गतिविधि में बच्चे अपनी सुविधानुसार हिस्सा लेते हैं। आयोजकों का मानना है कि इससे बच्चों में एकाग्रता, लेखन कौशल और सकारात्मक विचारों को बढ़ावा मिलता है।

By: Nivedita 
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सासाराम के शिव घाट मंदिर में राम नाम लिख रहे 800 बच्चे, एकाग्रता और अच्छे विचारों पर जोर

सासाराम, बिहार। आज के डिजिटल दौर में जहां बच्चों का काफी समय मोबाइल फोन पर बीतता है, वहीं सासाराम के शिव घाट मंदिर में बच्चे नियमित रूप से राम नाम लेखन कर रहे हैं। मंदिर से करीब 800 बच्चे जुड़े हुए हैं, जो अपनी सुविधानुसार अलग-अलग दिनों में पहुंचकर इस धार्मिक गतिविधि में हिस्सा लेते हैं। आयोजकों का मानना है कि राम नाम लिखने से बच्चों में एकाग्रता, अनुशासन और लेखन क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 7 बजे तक होता है राम नाम लेखन

शिव घाट मंदिर में राम नाम लेखन का कार्यक्रम प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक चलता है। इससे जुड़े बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार मंदिर पहुंचते हैं और कॉपी में राम नाम लिखते हैं। इस गतिविधि में बड़ी संख्या में बच्चों की सहभागिता बताई जा रही है।

मोबाइल से दूरी और लेखन अभ्यास पर जोर

आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि राम नाम लेखन बच्चों को कुछ समय मोबाइल फोन से दूर रहकर रचनात्मक और अनुशासित गतिविधि से जुड़ने का अवसर देता है। नियमित रूप से लिखने का अभ्यास उनकी लिखावट और लेखन कौशल को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। साथ ही, आयोजकों का मानना है कि इससे बच्चों का ध्यान केंद्रित करने और सकारात्मक विचारों की ओर बढ़ने में मदद मिलती है।

 

 

निगरानी के लिए सेवक रहते हैं सक्रिय

राम नाम लेखन की गतिविधि को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए कई सेवक लगातार निगरानी करते हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। वे बच्चों की सहभागिता पर ध्यान देते हैं और उन्हें नियमित रूप से इस अभ्यास से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

धार्मिक आस्था के साथ संस्कारों से जुड़ रहे बच्चे

आयोजन से जुड़े सेवकों के अनुसार, राम नाम लेखन केवल धार्मिक आस्था व्यक्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि बच्चों को अच्छे विचारों और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास भी है। उनका विश्वास है कि इस अभ्यास से बच्चों की ध्यान क्षमता और सोचने-समझने की शक्ति को प्रोत्साहन मिलता है। उनके मुताबिक, यह गतिविधि नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर कर सकारात्मक गुणों को बढ़ावा देने का संदेश देती है। सासाराम के शिव घाट मंदिर में चल रही यह पहल बच्चों को धार्मिक परंपराओं, नियमित लेखन और अनुशासित दिनचर्या से जोड़ने का एक माध्यम बन रही है।

 

रिपोर्ट – अविनाश श्रीवास्तव

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