मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश में मानसून और वर्षा की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से प्रमुख बांधों एवं जलाशयों में उपलब्ध जल की स्थिति, कम वर्षा वाले जिलों और वहां के जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की। बैठक में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और आगामी समय में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य से कम बारिश वाले प्रदेश के 12 जिलों में जल प्रबंधन के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए, ताकि लोगों को पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल प्रबंधन की योजनाओं में पेयजल की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया, जिनमें पानी की कम आवश्यकता होती है। इससे सीमित जल संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा और खेती पर कम बारिश के संभावित प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने जलगंगा अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जल संरक्षण के कार्यों को रोजगार के अवसरों से भी जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को काम मिल सके और जल स्रोतों के संरक्षण को गति मिले।
डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधनों के उचित प्रबंधन और संरक्षण के लिए जल उपभोक्ता समितियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रयासों में स्थानीय स्तर पर सहभागिता बढ़ाने से उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री के निर्देशों का मुख्य उद्देश्य कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बनाए रखना, कृषि में पानी का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना और जल संरक्षण के माध्यम से भविष्य की जरूरतों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना है।