दिल्ली के उत्तरपूर्वी के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भड़की हिंसा में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करने वाली एक याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है। इस दौरान पुलिस आयुक्त का प्रतिनिधित्व करने के मुद्दे पर सॉलिसीटर जनरल और दिल्ली सरकार के अधिवक्ता के बीच तीखी बहस हुई।
मामले की सुनवाई दोबारा शुरू हुई तो जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि परिस्थिति बहुत ही खराब है। हम सबने वो वीडियो देख हैं जिसमें कई नेता घृणास्पद भाषण दे रहे हैं। यह सभी न्यूज चैनलों पर देखा गया है।
पुलिस से बुधवार दोपहर 12:30 बजे तक हिंसा को लेकर अदालत ने जवाब देने के लिए कहा था, जस्टिस एस. मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि तथ्यों से वाकिश वरिष्ठ स्तर का एक पुलिस अधिकारी 12:30 बजे तक उनके समक्ष पेश हो।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस को हिंसा के मामलों में अदालत के निर्देश की जरूरत नहीं होती है और उसे स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। अदाल ने कहा कि यह बेहद जरूरी है। मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोनसाल्व्जि ने जस्टिस मुरलीधर की पीठ से इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की।
बुधवार को उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि, 10वीं और 12वीं कक्षा के जिन छात्रों के बोर्ड परीक्षा केंद्र हिंसा से प्रभावित उत्तर पूर्वी दिल्ली में हैं उन्हें अगले 10-15 दिनों के लिए परीक्षाओं के कार्यक्रम के बारे में एक बार में बताया जाए न कि रोज-रोज के आधार पर।