मध्य प्रदेश में मतदान संपन्न होने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस ने मतदान प्रतिशत, चुनावी माहौल, ईवीएम को लेकर उठ रहे सवालों और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर भाजपा सरकार को निशाने पर लिया। प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने प्रेस वार्ता में कई अहम विषयों पर पार्टी का पक्ष रखा।
कांग्रेस का कहना है कि इस चुनाव में भाजपा के कार्यकर्ता अपेक्षित रूप से सक्रिय नहीं दिखे, जिसका असर मतदान प्रतिशत पर पड़ा। पार्टी का दावा है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए, जबकि भाजपा का संगठन कई क्षेत्रों में निष्क्रिय नजर आया।
भाजपा नेताओं द्वारा चुनाव परिणाम से पहले जीत के दावे किए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला मतगणना के बाद सामने आता है, इसलिए किसी भी दल को पहले से जीत का दावा करने के बजाय जनता के निर्णय का इंतजार करना चाहिए। कांग्रेस ने यह भी कहा कि वह चुनाव परिणाम चाहे जो भी हों, जनता के जनादेश का सम्मान करेगी। पार्टी के अनुसार, जीत मिलने पर अहंकार नहीं किया जाएगा और हार की स्थिति में भी लोकतांत्रिक फैसले को स्वीकार किया जाएगा।

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में आदिवासियों की जमीनों पर कब्जे, अत्याचार की घटनाएं और वनाधिकार पट्टों के लंबित मामलों जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। कांग्रेस का दावा है कि वनाधिकार से जुड़े लाखों मामलों का अब तक समाधान नहीं हो पाया है और विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी परिवारों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास भी नहीं मिला है।
प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष ने आदिवासी समाज की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने सरकार से इन मुद्दों पर जल्द कार्रवाई करने और लंबित मामलों का समाधान करने की मांग दोहराई।
कांग्रेस ने कहा कि चुनाव परिणामों का सम्मान करना उसकी लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता है। वहीं, पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि आदिवासी अधिकारों, जनहित और सामाजिक मुद्दों को लेकर उसका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।