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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में 5 दिवसीय एकात्म पर्व का दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सत्ता की व्यवस्था को सनातन संस्कृति के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। इस एकात्म भाव को हम पंडित दीन दयाल उपाध्याय के उस दर्शन से भी देख सकते हैं। जो अंत्योदय की बात करते हैं।

By: Naredra 
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में 5 दिवसीय एकात्म पर्व का दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ

खण्डवाः  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में 5 दिवसीय एकात्म पर्व का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने एकात्म महोत्सव को सम्बोधित किया।

हर युग में मिलती है मध्यप्रदेश की गाथा- डॉ. मोहन यादव 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की अद्भुत धरती है। हर युग में मध्य प्रदेश की गाथा मिलती है। भगवान श्रीराम को वनवास मिला लेकिन मंदाकिनी माता के किनारे चित्रकूट के धाम में राम बनकर आए लेकिन श्रीराम बनकर दुनिया को रामराज्य को ले जाने वाला प्रदेश हमारा अपना मध्यप्रदेश है। जिसने भगवान राम के बाद का जीवन पूरे संसार के लिए पूज्यनीय बनाया। भगवान राम के संस्कारों और रिश्तों से परिवार के अंदर माता-पिता, पुत्र-पुत्री और पत्नी से संबंधों को अमर करने के साथ शासन के सूत्र रामराज्य का अहसास कराते हैं। वहीं पांच हजार साल पहले कंस को मारने के बाद भगवान कृष्ण मध्यप्रदेश की धरती अवंतिका (उज्जैन) में आए। सांदीपनि आश्रम में आकर भगवान श्रीकृष्ण के रूप में अपना जीवन अलग प्रकार से व्यतीत किया और कर्मवाद की शिक्षा के बलबूते पर 64 कला, 14 विद्या, चारों वेद के ज्ञाता बने। उनका जीवन सदैव कर्मवाद के आधार पर अद्भुत रूप से हम सबको प्रेरणा देता रहा है। ऐसे ही कठिन काल में कालड़ी केरल से चले हुए आदिगुरू शंकर, पालक शंकर बनकर आते हैं। गोविंदपाद जी महाराज के आशीर्वाद से शंकराचार्य बनकर सनातन धर्म की धारा को अविरल रूप से बहाने के लिए युगों युगों तक उन्हें स्मरण करते रहेंगे।

 सनातन संस्कृति के साथ सत्ता की व्यवस्था आगे बढ़ा रहे मोदी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सत्ता की व्यवस्था को सनातन संस्कृति के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। इस एकात्म भाव को हम पंडित दीन दयाल उपाध्याय के उस दर्शन से भी देख सकते हैं। जो अंत्योदय की बात करते हैं। अंत्योदय के साथ शासन के सूत्र केवल भौतिक सुखों में ही पर्याप्त नहीं होंगे। क्योंकि भौतिक सुख तो दुनिया के कई देशों में है। भारतीय सनातन संस्कृति युगों युगों से जानी जाती हैं। हमारी केवल भक्षण वाली संस्कृति नहीं है हमारी उदारमना संस्कृति अपने से देने की संस्कृति है। वह संतों के माध्यम से ही हो सकती है, जिनके माध्यम से सनातन संस्कृति ने पंच तत्वों का बना हुआ शरीर केवल यह ही हमारे लिए पर्याप्त नहीं है। भगवान कृष्ण गीता में 13वें अध्याय के माध्यम से यह अहसास कराते हैं कि यह जड़ चेतन का स्वरूप हम शिव रूप में भी जानते हैं और शक्ति रूप में भी जानते हैं।

17 से 21 अप्रैल तक चलेगा आयोजन

17 अप्रैल से 21 अप्रैल पांच दिन तक जो यह आयोजन चलेगा। पंचदिवसीय एकात्म पर्व जिसमे सभी दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक संगम कई सारे कार्यक्रमों के माध्यम से आप सभी के मुखारविंद से आज से प्रारंभ होने वाली यात्रा एक अतिथि ज्ञान विज्ञान यात्रा के समान हमारे जीवन को भी धन्य करेगी। मध्य प्रदेश सरकार को भी धन्य करेगी। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंडाल में मौजूद सभी से एकात्मता का संकल्प भी दोहराया।

सीएम  डॉ. यादव ने जगदगुरू शंकराचार्य का किया अभिनंदन

इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में 5 दिवसीय एकात्म पर्व पर एकात्म धाम में पुस्तक “वेदांतसिद्धान्तचन्द्रिका विथ उदग्र” का विमोचन किया। डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज का अंगवस्त्रम , आदि गुरु शंकराचार्य जी की धातु की मूर्ति और चित्र भेंट कर अभिनन्दन किया।

 

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