Home भाग्यफल Chaitra Navratri 2021 : जानें कौन से फूल देवी मां को नहीं चढ़ाने चाहिए, होता है अनिष्ट?

Chaitra Navratri 2021 : जानें कौन से फूल देवी मां को नहीं चढ़ाने चाहिए, होता है अनिष्ट?

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नई दिल्ली : 13 अप्रैल 2021 से चैत्र नवरात्र की शुरूआत हो चुकी है, जिसे लेकर भक्तजन लगातार मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा कर रहे है। मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन तमम जतन कर रहें हैं, वे सुबह उठकर स्नान कर रहे है, पेड़ों से पुष्प ला रहे है और विधि विधान से पूजा कर रहे है। लेकिन इन सभी विधियों के बीच कुछ ऐसी गलतियां है, जो आप ना चाहकर भी कर बैठते है।

क्या है वो गलती –

गौरतलब है कि कभी-कभी आप अपनी अनभिज्ञता में कुछ ऐसे पुष्प मातारानी को अर्पत कर देते है, जिसे देखकर वो कोपित तक हो सकती है। वहीं कुछ फूल ऐसे गैं जिन्हें अर्पित करने से मां भवानी अत्यंत प्रसन्न होती है। तो आइये हम जानते है कि मां के किस रूप को कौन सा फूल अर्पित करना चाहिए।

माता रानी को अर्पित करें ये पुष्प :-

ज्‍योतिषशास्‍त्र में बताया गया है कि विशेष फूलों में विशिष्ट देवता के पवित्रक, अर्थात उस देवता के सूक्ष्मातिसूक्ष्म कण आकर्षित करने की क्षमता अन्य फूलों की तुलना में अधिक होती है। ऐसे फूल जब आप मूर्ति पर चढ़ाते हैं, तो मूर्ति को जागृत करने में सहायता मिलती है। इससे हमें मूर्ति के चैतन्य का लाभ शीघ्र होता है। इसलिए विशिष्ट देवी को विशेष फूल ही अर्पित करें।

शास्‍त्र के मुताबिक, मां दुर्गा को मोगरा और पारिजात, मां लक्ष्मी को गुलाब और स्‍थलकमल, सप्तशृंगी मां को कवठी चाफा, मां शारदा को रातरानी, देवी योगेश्वरी को सोनचाफा, मां रेणुका को बकुल, वैष्‍णोंदेवी को रजनीगंधा और मां विंध्यावासिनी को कमल अर्पित करें। ऐसी मान्‍यता है कि इन फूलों से मातारानी अत्‍यंत प्रसन्‍न होती हैं और जातकों की मनोवांछित कामनाएं पूरी होती हैं।

ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार देवी मां को कभी भी अपवित्र स्थलपर उत्पन्न हुए, अनखिले पुष्प अर्थात कलियां, बिखरी हुई पंखुड़ियों वाले गंधरहित अथवा तीव्र गंधवाले, सूंघे हुए पुष्प, पृथ्वीपर गिरे हुए, बाएं हाथ से लाए गए, जल में डुबोकर धोएं हुए पुष्प, दूसरों को अप्रसन्न कर लाए हुए पुष्प,पहने हुए अधोवस्त्र में अर्थात निचले वस्त्र में लाए गए ऐसे पुष्प देवी मां को गलती से भी न चढ़ाएं। ऐसे फूलों को चढ़ाने से मां कोपित होती हैं और जातकों को पूजा का लाभ भी नहीं मिलता।

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