नई दिल्ली : हिंदू धर्म में आंवला नवमी का विशेष महत्व है, जो इस साल 12 नवंबर शुक्रवार के दिन पड़ रहा है। इस दिन दान-धर्म का भी खास महत्व बताया गया है। कहते हैं कि इस दिन दान करने से उसका पुण्य व्यक्ति को इस जन्म में तो मिलता ही है। साथ ही, अगले जन्म में भी मिलता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आंवला नवमी के दिन आंवला के वृक्ष की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है।
आपको बता दें कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के नौंवे दिन आंवला नवमी का पर्व (Kartik Month Amla Navami 2021) मनाया जाता है।
सर्वप्रथम मां लक्ष्मी की होती है पूजा
आंवला नवमी के दिन सर्वप्रथम मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार माता लक्ष्मी एक बार पृथ्वीलोक पर भ्रमण के लिए आईं। यहां आकर उन्हें भगवान विष्णु और शिव की पूजा एक साथ करने की इच्छा हुई। ऐसे में उन्हें ध्यान आया कि तुलसी और शिव के स्वरुप बैल के गुण आंवले के वृक्ष में होते है। इसमें दोनों का अंश है, इसलिए मां लक्ष्मी ने आंवले को ही शिव और विष्णु का स्वरूप मानकर पूजा की थी। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर दोनों देव एक साथ प्रकट हुए। लक्ष्मी जी ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर विष्णु जी और भगवान शिव को खिलाया। उसी के संदर्भ में हर साल कार्तिक शुक्ल नवमी के दिन आंवला के पेड़ की पूजा की जाती है।
आंवला नवमी 2021 शुभ मुहूर्त (Amla Navami 2021 Shubh Muhurat)
12 नवंबर 2021, शुक्रवार को सुबह 06 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक पूजन का शुभ मुहूर्त है।
आंवला नवमी तिथि प्रारंभ (Amla Navami Tithi 2021)
12 नवंबर 2021, शुक्रवार को सुबह 05 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर, 13 नवंबर, शनिवार को सुबह 05 बजकर 30 मिनट तक रहेगी।