भगोरिया मेला मध्यप्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों में निवास करने वाले भील, भिलाला और बारेला जनजातीय समुदायों का प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव है। यह पर्व होली से सात दिन पूर्व प्रारंभ होकर होलिका दहन तक चलता है। फसल कटाई के बाद मनाया जाने वाला यह मेला जनजातीय समाज के लिए आनंद, उमंग, मेल-मिलाप और सामूहिक उल्लास का प्रतीक है।
फागुन माह में जब प्रकृति स्वयं रंग-बिरंगी छटा बिखेरती है, तब पश्चिम निमाड़ से लेकर झाबुआ तक के जनजातीय अंचलों के साप्ताहिक हाट-बाजार भगोरिया के रंग में रंग जाते हैं।
इन बाजारों में होली के लिए विशेष खरीदारी होती है। जरूरत की वस्तुओं, मिठाइयों, पारंपरिक आभूषणों और दैनिक उपयोग की चीजों से बाजार गुलजार रहते हैं। गैर-जनजातीय समुदाय के लिए भी भगोरिया के हाट आकर्षण का केंद्र होते हैं और व्यापारी वर्षभर की बड़ी कमाई इन्हीं दिनों में कर लेते हैं।
भगोरिया मेले की सबसे बड़ी विशेषता है ढोल और मांदल की गूंज पर किया जाने वाला पारंपरिक आदिवासी नृत्य। ग्रामीण दल पारंपरिक वेशभूषा में, एक जैसे रंगों के परिधान पहनकर अपनी अलग पहचान के साथ नृत्य करते हैं। महिलाएं और पुरुष चांदी के आभूषणों से सजे होते हैं, जो भील जनजाति में समृद्धि और सम्मान का प्रतीक माने जाते हैं। पूरा मेला संगीत, नृत्य और रंगों के संगम से जीवंत हो उठता है।
भगोरिया केवल मेला नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद का उत्सव है। मान्यता है कि युवा अपने मनपसंद साथी को गुलाल लगाकर या पान खिलाकर अपने प्रेम की अभिव्यक्ति करते हैं। कुछ क्षेत्रों में मनचाहे साथी के साथ भागकर विवाह की परंपरा भी प्रचलित है, जिसे समाज की स्वीकृति प्राप्त होती है। यह परंपरा भगोरिया को प्रेम और स्वतंत्रता का उत्सव बनाती है।
आलीराजपुर जिले का वालपुर भगोरिया मेला अपनी ऐतिहासिक प्राचीनता और सांस्कृतिक विविधता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। किंवदंती है कि इसकी शुरुआत राजा भोज के समय भील राजाओं द्वारा की गई थी। वालपुर तीन राज्यों- मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात-के निकट स्थित होने के कारण जनजातीय संस्कृतियों का संगम स्थल माना जाता है। यहां आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4 मार्च 2025 को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनजातीय देवलोक महोत्सव के दौरान भगोरिया पर्व को राजकीय उत्सव का दर्जा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगोरिया फागुन के रंगों में रमा उल्लास का पर्व है और सरकार इस परंपरा को पूरी गरिमा के साथ संरक्षित और प्रोत्साहित करेगी।
वर्ष 2026 में भगोरिया महोत्सव 24 फरवरी (मंगलवार) से प्रारंभ होकर 2 मार्च (सोमवार) तक आयोजित होगा। बड़वानी जिले के निवाली में 2 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं भगोरिया महोत्सव में शामिल होंगे। भगोरिया मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति, परंपरा, प्रेम और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा को करीब से देखने और समझने का अनूठा अवसर प्रदान करता है, जहां रंग, संगीत और मानवीय भावनाएं एक साथ उत्सव का रूप लेती हैं।