माघ और आषाढ़ के नवरात्रों को गुप्त नवरात्र इसलिए कहा जाता है क्यूंकि इन 9 दिनों में दुर्गा की साधना गुप्त रूप से की जाती है, ये नवरात्र भौतिक सुख सुविधाओं के लिए नहीं बल्कि विशेष साधना प्राप्त करने के लिए किये जाते है और यही कारण है कि इन 9 दिनों को गुप्त बोला जाता है यानि की छिपकर।
आपको बता दे कि शिव ने त्रिपुरासुर के वध के लिए शक्ति की उपासना की थी वही भगवान राम ने भी रावण का वध करने के लिए शक्ति को प्रसन्न करने के लिए आराधना की थी।
दूसरी बात यह भी है कि गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। तंत्र मन्त्र से जुड़े हुए लोग महीनों तक इन नवरात्रों का इंतज़ार करते है ताकि वो लम्बी और दुर्लभ साधना कर शक्तियों को प्राप्त कर सके।
दरअसल दशमहाविद्या अर्थात महान विद्या रूपी देवी, महाविद्या, देवी दुर्गा के दस रूप हैं, इन्हें दस महाविद्या के नाम से भी जाना जाता है। ये दसों महाविद्याएं आदि शक्ति माता पार्वती की ही रूप मानी जाती हैं।
ये माता काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्न मां, त्रिपुर भैरवी, धूमावति माता, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी के नाम से जानी जाती है।