जबलपुरः पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कथित पत्र को लेकर सियासत गर्म है। भोपाल पुलिस के सहयोग से राजस्थान पुलिस द्वारा मध्य प्रदेश कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के मामले को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं को मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया साथ ही उनकी गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को नहीं दी गयी। भोपाल निवासी खिजर खान की तरफ से दायर याचिका में कहा गया 20 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग 3 बजे सायबर क्राइम पुलिस स्टेशन भोपाल में पुलिस द्वारा कांग्रेस आईटी सेल के निखिल, बिलाल व इनाम को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। उन्हें दो दिन तक किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगल पीठ ने याचिका में लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर भोपाल से सवाल किया कि बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को राजस्थान पुलिस को कैसे सौंप दिया।
इस दौरान शासन की तरफ से बताया गया कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों को पुलिस थाने बुलाकर पूछताछ की गई और फिर उनके परिवार वालों को सौंप दिया गया। राजस्थान पुलिस ने फिर से फोन कर बताया था कि तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है। अगले दिन दोपहर को फिर सायबर सेल बुलाया और राजस्थान पुलिस के आने पर उन्हें सौंप दिया गया। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया तीनों को 20 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और छोडा नहीं गया था।
बहरहाल युगलपीठ ने भोपाल के जहांगीराबाद स्थित पुलिस परिवहन व अनुसंधान संस्थान के 20 अप्रैल 2026 के सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही राजस्थान पुलिस को तीनों कार्यकर्ताओं को अगली सुनवाई 27 अप्रैल न्यायालय में पेश किए जाने के निर्देश दिए हैं।