मध्य प्रदेश सरकार ने चालू वर्ष को “कृषि वर्ष” के रूप में घोषित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने के लिए बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। यह जानकारी उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी।
मंत्री कुशवाह ने बताया कि उद्यानिकी विभाग द्वारा 30 जनवरी 2026 को भोपाल के लिंक रोड नंबर-1 पर राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
प्रदर्शनी की थीम ‘वाइब्रेंट’ रखी गई है।
इसमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों में उत्पादित फूलों की प्रमुख किस्में प्रदर्शित होंगी।
नारायण सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश आज पुष्प उत्पादन में देश में द्वितीय स्थान पर है। प्रदेश में लगभग 45,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है। इससे प्रतिवर्ष करीब 5 लाख मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है। लगभग 400 किसान सक्रिय रूप से इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
उज्जैन: वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए उज्जैन के समीप 100 एकड़ में विशेष पुष्प उत्पादन क्लस्टर विकसित किया जा रहा है।
गुना: यहां के गुलाब दिल्ली, मुंबई सहित देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुके हैं।
मसाला बेल्ट:
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उन्हें प्रोसेसिंग यूनिट्स से जोड़कर अतिरिक्त आय दिलाना है।
गुलाब से गुलकंद और एसेंस निर्माण।
शिवपुरी में प्याज पेस्ट, पाउडर, शैम्पू और मूंगफली प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित।
शाजापुर में बड़ी फूड प्रोसेसिंग यूनिट प्रस्तावित।
काली हल्दी के कॉस्मेटिक उपयोग पर भी विचार।
फूलों के उत्पादन को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना से जोड़ा गया है। उद्यानिकी विभाग ने किसानों के लिए विशेष पोर्टल विकसित किया है, जहां वे अपनी जरूरतें और मांग दर्ज कर सकते हैं। उद्देश्य यह है कि प्रोसेसिंग के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य मिले और वे केवल एमएसपी पर निर्भर न रहें।
मंत्री कुशवाह ने बताया कि मुख्यमंत्री के आह्वान पर “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही महाराष्ट्र (जलगांव) और विदेशों की सफल तकनीकों को अपनाकर मध्य प्रदेश को कृषि और उद्यानिकी का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। पुष्प उत्पादन, फूड प्रोसेसिंग और नवाचार के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।