मुरैना, मध्य प्रदेश: जिला चिकित्सालय में सिर में गंभीर चोट से पीड़ित एक युवती को डिस्चार्ज किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि युवती की हालत गंभीर थी, वह बिस्तर से उठने में असमर्थ थी और उसे लगातार चक्कर आ रहे थे। इसके बावजूद डॉ. अनूप गुप्ता ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी। इस शिकायत के बाद मरीज के उपचार और डिस्चार्ज प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कैलारस से रेफर होकर जिला अस्पताल पहुंची थी युवती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवती को कैलारस से रेफर किए जाने के बाद 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 3 बजे मुरैना जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 10 अक्टूबर को दोपहर में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।शिकायत के मुताबिक, युवती को सिर में गंभीर चोट लगी थी और उसे बिस्तर से उठने में परेशानी के साथ लगातार चक्कर आने की शिकायत थी। ऐसे में परिजनों ने डिस्चार्ज किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।हालांकि, युवती की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति, जांच रिपोर्ट और डिस्चार्ज के समय डॉक्टर की ओर से दर्ज किए गए मेडिकल आकलन की जानकारी सामने आना बाकी है।
डॉक्टर की ड्यूटी को लेकर भी लगाए गए आरोप
शिकायतकर्ता ने डॉ. अनूप गुप्ता पर ड्यूटी के दौरान अपने निजी अस्पताल श्रीराम में सेवाएं देने का आरोप भी लगाया है। शिकायत में यह सवाल उठाया गया है कि क्या जिला चिकित्सालय में मरीजों को उचित उपचार दिया जा रहा था।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित डॉक्टर का पक्ष और ड्यूटी से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सिविल सर्जन से संपर्क का प्रयास, जवाब का इंतजार
मामले के संबंध में सिविल सर्जन से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार फोन नहीं उठाया गया। अस्पताल के स्टाफ से पूछताछ करने पर बताया गया कि डॉक्टर ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया है।
अब मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि युवती को छुट्टी देने से पहले उसकी स्थिति का समुचित चिकित्सकीय आकलन किया गया था या नहीं। साथ ही, डिस्चार्ज से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार के विवरण की जांच से मामले के तथ्यों को समझने में मदद मिल सकती है।
मरीज की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस मामले में मुख्य सवाल मरीज की सुरक्षा और अस्पताल की डिस्चार्ज प्रक्रिया से जुड़ा है। सिर में गंभीर चोट के बाद मरीज को छुट्टी देने का निर्णय उसकी चिकित्सकीय स्थिति, जांच और डॉक्टर के आकलन पर आधारित होना चाहिए।
मामले की निष्पक्ष जांच होने से शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या खंडन किया जा सकेगा। जिला स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
रिपोर्ट: बंटी सैमिल, मुरैना