शेखपुरा। बिहार के शेखपुरा जिले में शराब बरामदगी के मामले में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में बरबीघा मिशन थानाध्यक्ष आदित्य रंजन को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने यह कार्रवाई यातायात डीएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर की। आरोप है कि जब्त देसी शराब के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय शराब को नष्ट कर दिया गया। फिलहाल थाने की जिम्मेदारी अपर थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार को सौंपी गई है।
मामला 20 सितंबर का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, एलटीएफ की टीम ने बरबीघा नगर क्षेत्र के सामाचक मोहल्ले में छापेमारी की थी। इस दौरान करीब 10 लीटर देसी शराब बरामद हुई, जिसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मिशन थाने को सौंपा गया था। आरोप है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय जब्त शराब को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इसी कार्रवाई को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे थे।
सामाचक मोहल्ले के निवासी संजीव कुमार, दीपक कुमार और सुरेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि बरामद शराब कथित तौर पर कारोबारी मधुसूदन चौधरी की थी। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस पर आरोपी को बचाने की कोशिश करने के आरोप भी लगाए। स्थानीय लोगों की ओर से कथित संरक्षण और पैसों के लेन-देन को लेकर भी सवाल उठाए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित लोगों की भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने जांच के निर्देश दिए। यातायात डीएसपी की जांच रिपोर्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।इसके बाद मिशन थानाध्यक्ष आदित्य रंजन को निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया गया। यह कार्रवाई शराब बरामदगी के मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के कथित उल्लंघन को लेकर की गई।
आदित्य रंजन के निलंबन के बाद मिशन थाने का दैनिक कामकाज अपर थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार को सौंपा गया है। इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे की विभागीय और कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। शराब बरामदगी के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और जब्त सामग्री के निस्तारण से संबंधित आरोप पुलिस की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाते हैं। मामले से जुड़े आरोपों और कथित वित्तीय लेन-देन की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जानी चाहिए।