नालंदा। अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों के जल्द और आपसी सहमति से निपटारे की दिशा में नालंदा में मध्यस्थता अभियान 3.0 शुरू किया गया है। इस पहल का उद्देश्य पक्षकारों को बातचीत और समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान तलाशने का अवसर देना है, जिससे समय और कानूनी खर्च दोनों को कम किया जा सके।
पटना हाईकोर्ट और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में यह अभियान 1 अक्टूबर 2026 से शुरू किया गया है। इसके तहत बिहारशरीफ और हिलसा न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा कर करीब 2250 मामलों को चिन्हित किया गया है। इन मामलों में पात्र पक्षकारों को मध्यस्थता की प्रक्रिया के जरिए विवाद समाप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह न्यायाधीश राजेश कुमार गौरव ने बताया कि चिन्हित मामलों के पक्षकारों को अभियान की जानकारी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि संबंधित न्यायालयों में नोटिस तैयार किए जा रहे हैं और पारा विधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से पक्षकारों तक आवश्यक सूचना पहुंचाई जाएगी।

अभियान के माध्यम से उन लोगों को विशेष रूप से लाभ मिल सकता है, जिनके मामले लंबे समय से अदालत में लंबित हैं और जो आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने के लिए तैयार हैं। मध्यस्थता के जरिए पक्षकार बातचीत के माध्यम से समाधान तक पहुंच सकते हैं। इससे मुकदमे की लंबी प्रक्रिया से बचने और समय व खर्च कम करने का अवसर मिल सकता है।
बिहारशरीफ न्यायालय में लंबित मामलों से जुड़े पक्षकार सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बिहारशरीफ के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। वहीं, हिलसा न्यायालय में लंबित मामलों के पक्षकार सचिव, तालुका विधिक सेवा समिति, हिलसा के कार्यालय में संपर्क कर अभियान और मध्यस्थता प्रक्रिया से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
मध्यस्थता अभियान 3.0 को सफल बनाने के लिए जिले में व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लंबित मामलों से जुड़े पक्षकारों को मध्यस्थता के विकल्प की जानकारी देना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने लोगों से अपील की है कि वे अपने मामले की पात्रता और मध्यस्थता की प्रक्रिया की जानकारी लेकर इस पहल का लाभ उठाएं। अभियान के जरिए न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और आपसी सहमति से विवादों के समाधान को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।