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पुलिस कार्रवाई में नहीं हुई किसानों की मौत: केंद्र

Farmers did not die in police action Center;संसद के जारी शीतकालीन सत्र में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का सदन में लिखित जवाब । किसानों में बेचैनी बढ़ी। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि शून्य बजट की कृषि को प्रोत्साहन देने,

By Amit ranjan 
Updated Date

मुमताज़ आलम रिज़वी

नई दिल्ली: किसानों के आंदोलन वापस लेने के एक दिन बाद ही केंद्र सरकार ने संसद में अपने एक लिखित जवाब में कहा कि आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में एक भी किसान नहीं मारे गए। सरकार ने यह भी साफ़  कि मुवाअज़ा का ताल्लुक़ राज्य सरकारों से है।  सरकार के इस जवाब से एक बार फिर किसानों में बेचैनी पैदा हो गई है।ख़्याल रहे कि किसानों के विभिन्न संगठन केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। इन कानूनों को हाल ही में वापस ले लिया गया है। वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा ने गुरुवार को इस आंदोलन के समापन का एलान किया था। आंदोलन को समाप्त करने का फैसला केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों की लंबित मांगों को स्वीकार करने के बाद लिया गया। आज केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों के लिए मुआवजे का मुद्दा राज्यों से संबंधित है। यानी इसका केंद्र सरकार से कोई सरोकार नहीं है।

संसद में एक सवाल के लिखित उत्तर में तोमर ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान किसी भी किसान की मौत पुलिस की कार्रवाई की वजह से नहीं हुई। वह कांग्रेस नेता धीरज प्रसाद साहू और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह के संयुक्त प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। बता दें कि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां इस आंदोलन के दौरान किसानों की मौत का मामला लंबे समय से उठाते चले आ रहे हैं।

दूसरी जानिब एमएसपी को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि शून्य बजट की कृषि को प्रोत्साहन देने, देश की जरूरत के अनुसार फसलों के चक्र को बदलने और और एमएसपी को अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए एक समिति के गठन पर विचार किया जा रहा है। केंद्र कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर 22 अनिवार्य फसलों और गन्ने के उचित लाभकारी मूल्य के लिए एमएसपी तय करता है।

याद रहे की किसानों की तहरीक 26 नवंबर 2020 से शुरू हुई थी जो अब ख़त्म हो गई है। इन किसानों में मुख्यत: पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के थे। 29 नवंबर को संसद ने इन कानूनों की वापसी के लिए एक विधेयक पारित किया था। यह आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हुआ जिसके साथ 40 किसान संगठन जुड़े हैं। 11 दिसंबर को किसान अपने अपने घरों को लौट जायेंगे जैसा कि मोर्चा ने एलान किया है।

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