बड़वानी, मध्य प्रदेश। ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती से परेशान किसानों ने बिजली विभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया और अपनी समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि रात में चार से पांच बार बिजली कटने से उनकी नींद और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। वहीं, बिजली विभाग ने दो से तीन दिनों में व्यवस्था सुधरने का भरोसा दिया है। विधायक राजन मंडलोई ने भी कटौती को लेकर नाराजगी जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
किसान धन्नालाल शंकर ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति का कोई निश्चित समय नहीं है। रात के दौरान चार से पांच बार बिजली कट जाती है, जिससे खेतों की सिंचाई करना मुश्किल हो रहा है। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण दोबारा बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे।
अधीक्षण यंत्री अरविंद सिंह ने बताया कि इस वर्ष कम बारिश के कारण हाइडल बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा कुछ थर्मल पावर प्लांट में रखरखाव का काम चलने से बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ा है। उनके मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोड शेडिंग की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लोड डिस्पैच सेंटर के निर्देशों के अनुसार अलग-अलग फीडरों में बिजली कटौती की जा रही है। ग्रामीणों की समस्या से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है। विभाग को उम्मीद है कि अगले दो से तीन दिनों में स्थिति नियंत्रित हो जाएगी। उन्होंने खेती के लिए 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की बात भी कही।

विधायक राजन मंडलोई ने बिजली कटौती पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ग्रामीणों को बिना पूर्व सूचना के बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई, खेती और ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। उन्होंने नवरात्रि के दौरान गांवों में बिजली आपूर्ति सुचारु रखने की मांग की। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि त्योहार के दौरान भी बिजली कटौती जारी रही तो ग्रामीणों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और विभागीय कार्यालय का घेराव किया जा सकता है।
राजन मंडलोई ने स्मार्ट मीटर और बिजली बिलों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पहले जिन घरों में करीब 200 रुपये का बिल आता था, वहां अब 2,000 से 5,000 रुपये तक के बिल आ रहे हैं। उन्होंने बिजली दरों में बढ़ोतरी और शिकायतों के समाधान में देरी पर भी नाराजगी जताई। विधायक ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं की समस्याओं का उचित समाधान नहीं कर रहा है। वहीं, अधीक्षण यंत्री ने बताया कि स्मार्ट मीटर से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए चेक मीटर लगाए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर लैब टेस्ट के जरिए समस्या का समाधान किया जा रहा है।
अघोषित बिजली कटौती को लेकर किसानों और बिजली विभाग के बीच तनाव बढ़ गया है। विभाग ने दो से तीन दिनों में स्थिति सुधरने का आश्वासन दिया है, जबकि किसानों ने जल्द राहत नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि बिजली आपूर्ति में सुधार को लेकर विभाग कितनी जल्दी कदम उठाता है।