Home विदेश कोरोना महामारी के बीच दुनिया की कई प्रभावशाली लोग इस दुनिया को कह गए अलविदा

कोरोना महामारी के बीच दुनिया की कई प्रभावशाली लोग इस दुनिया को कह गए अलविदा

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नई द‍िल्‍ली: वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के प्रकोप का साल रहा। इस खतरनाक वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचाया। अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे शक्तिसाली राष्‍ट्र ने भी इसके समक्ष घुटने टेक दिए। दुनिया के सर्वाधिक प्रभावित देशों में अमेरिका अग्रणी देश बना हुआ है। कोरोना महामारी के बीच दुनिया की मानी-जानी कई हस्‍तियां आज हमारे बीच नहीं हैं। दुनिया की कई प्रभावशाली लोग इस दुनिया से अलविदा कह गए। आइए जानते हैं उन प्रभावसाली लोगों के बारे में जो अब हमारे बीच नहीं हैं।

होस्नी मुबारक

मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह काफी अरसे से बीमारी से जूझ रहे थे। हुस्नी मुबारक ने 30 साल तक मिस्र की सत्ता संभाली थी। उन्हें 2011 में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता छोड़नी पड़ी थी। अप्रैल 2011 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। मुबारक को आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हत्या का दोषी पाया गया था, लेकिन बाद में उनकी सजा को माफ कर दिया गया। मार्च, 2017 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था। मिस्र में सत्ता के दौरान मुबारक अमेरिका के सहयोगी बने रहे। वे इजरायल और मिस्र की दोस्ती के पक्षधर रहे। मुबारक का जन्‍म 4 मई, 1928 को नील डेल्टा में एक गांव में हुआ था। उनके सत्ता के दौरान मिस्र में भ्रष्टाचार, पुलिस की क्रूरता, राजनीतिक दमन और आर्थिक समस्याएं हमेशा से बनी रहीं। मुबारक के परिवार में उनकी पत्नी सुजैन और उनके बेटे गमाल और अला हैं।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव के दौरान सुर्खियों में रहीं रूथ बेडर गिंसबर्ग

19 सितंबर, 2020 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की न्‍यायाधीश रूथ बेडर गिंसबर्ग वाशिंगटन स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। वह महिला अधिकारों की प्रबल हिमायती थीं। गिंसबर्ग का निधन अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव के कुछ हफ्ते पहले हुआ था। गिंसबर्ग का निधन मेटास्टेटिक अग्नाशय कैंसर से हुआ है। उन्होंने अपने आखिरी साल उदारवादी विंग के निर्विवाद नेता के रूप में बिताए।

वह अपने प्रशंसकों के बीच रॉक स्टार जैसी बन गईं। युवा महिलाएं उन्हें प्यार से नॉटिर्ल आरबीजी कहती थीं। उन्होंने महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के प्रति लचीलापन दिखाया था। कैंसर के साथ उनकी लड़ाई वर्ष 1999 में शुरू हुई थी। उन्होंने 2016 के राष्ट्रपति अभियान के दौरान मीडिया साक्षात्कारों की एक श्रृंखला में ट्रंप का विरोध किया, जिसमें उन्हें फर्जी कहा गया था। हालांकि उन्होंने जल्द ही माफी मांग ली थी।

 

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