नई दिल्ली। ग्रामीण रोजगार योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी हाजिरी पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप का नया संस्करण जारी किया गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि नए ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन समेत कई आधुनिक तकनीकी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इसके अलावा नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्रों में ऑफलाइन हाजिरी दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
NMMS ऐप के उन्नत संस्करण को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है। इसमें चेहरे की पहचान, लाइवनेस डिटेक्शन और डिवाइस की सुरक्षा जांच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपस्थिति दर्ज कराते समय वास्तविक श्रमिक ही मौजूद हो और फर्जी हाजिरी की आशंका कम हो।

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को ध्यान में रखते हुए ऐप में ऑफलाइन सुविधा भी दी गई है। नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत हाजिरी दर्ज की जा सकेगी और कनेक्टिविटी बहाल होने के बाद रिकॉर्ड अपलोड किया जा सकेगा। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रमिकों के चेहरे का मिलान नहीं होने या तकनीकी समस्या आने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विशेष छूट के लिए अनुरोध करने का प्रावधान भी रखा गया है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वीबी-जी राम जी योजना के तहत देश की 2.41 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में 31.23 लाख कार्यस्थलों पर काम संचालित किया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक 2.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 3.65 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इस दौरान करीब 46 करोड़ मानवदिवस सृजित होने की जानकारी भी दी गई। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने योजना के तहत 95,692 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। राज्यों के हिस्से को शामिल करने पर कुल राशि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया है।

श्रमिकों की उपस्थिति और ग्रामीण रोजगार कार्यों में अनियमितताओं को रोकने के लिए एआई आधारित संदिग्ध तस्वीरों की जांच, कार्यों का वास्तविक मापन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और औचक निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। मंत्री ने कहा कि जांच में अनियमितता सामने आने पर संबंधित मामलों में कार्रवाई की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने फार्मर आईडी अभियान की प्रगति भी साझा की। उनके मुताबिक, देश में अब तक 10 करोड़ 99 लाख 70 हजार फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ फार्मर आईडी तैयार करना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब लगभग 30 हजार और फार्मर आईडी बनाने की जरूरत बताई गई है। फार्मर आईडी के जरिए किसानों की पहचान को डिजिटल रूप से दर्ज करने और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।