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इंदौर में जमीन आवंटन पर कांग्रेस के सवाल, ₹490 करोड़ के निवेश और 4 हजार रोजगार के वादे की जांच की मांग

इंदौर के ग्राम कुमेड़ी में जमीन आवंटन और वर्ष 2007 के निवेश समझौते को लेकर कांग्रेस ने लोकायुक्त जांच की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि ₹490 करोड़ के निवेश और 4,000 रोजगार का प्रस्ताव पूरा नहीं हुआ। कांग्रेस ने जमीन के उपयोग, बिक्री और संभावित सरकारी राजस्व नुकसान की जांच कराने की मांग की है।

By: Nivedita 
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इंदौर में जमीन आवंटन पर कांग्रेस के सवाल, ₹490 करोड़ के निवेश और 4 हजार रोजगार के वादे की जांच की मांग

भोपाल।  मध्य प्रदेश के इंदौर में जमीन आवंटन और निवेश समझौते को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रवक्ता राहुल राज ने वर्ष 2007 में हुए एक निवेश समझौते की लोकायुक्त से जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने परियोजना के लिए आवंटित जमीन के इस्तेमाल और निवेश से जुड़े वादों पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है।

490 करोड़ रुपये के निवेश का था प्रस्ताव

कांग्रेस के मुताबिक, वर्ष 2007 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान जेकेएम इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से इंदौर के ग्राम कुमेड़ी में एक परियोजना का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें करीब 490 करोड़ रुपये के निवेश, 280 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश और बिग मॉल परियोजना के माध्यम से लगभग 4,000 लोगों को रोजगार देने की बात कही गई थी। पार्टी का आरोप है कि इस परियोजना के लिए संबंधित जमीन को इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना से मुक्त कराया गया, लेकिन प्रस्तावित परियोजना अपने मूल स्वरूप में पूरी नहीं हुई।

जमीन के इस्तेमाल और विकास पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि संबंधित जमीन पर बाद में होटल, आवासीय कॉलोनियों और अन्य भवनों का विकास किया गया। उन्होंने जमीन के उपयोग में बदलाव, डायवर्शन, कॉलोनी विकास और संपत्तियों की बिक्री की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है। मुकेश नायक के अनुसार, यह जमीन इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 151 का हिस्सा थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निवेश समझौते की शर्तों के पालन को लेकर संदेह है, तो इतने वर्षों तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

 

 

वर्ष 2024 के पत्राचार की जांच की मांग

कांग्रेस नेताओं ने वर्ष 2024 में भू-अर्जन अधिकारी की ओर से जारी पत्रों का हवाला देते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। प्रवक्ता राहुल राज ने वर्ष 2010 से 2024 के बीच हुए कथित विभागीय पत्राचार और जमीन के विकास एवं बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की। पार्टी का कहना है कि पूरे मामले में जमीन आवंटन से लेकर उसके वर्तमान उपयोग तक की प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए, ताकि किसी भी संभावित अनियमितता का पता लगाया जा सके।

इन्फोसिस को आवंटित जमीन का भी दिया उदाहरण

मुकेश नायक ने इन्फोसिस को आवंटित लगभग 130 एकड़ जमीन वापस लिए जाने का उदाहरण देते हुए प्रशासनिक कार्रवाई में समानता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि निर्धारित उद्देश्यों को पूरा नहीं करने पर किसी परियोजना की जमीन वापस ली जा सकती है, तो संबंधित मामले में भी नियमों के अनुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से सभी संबंधित मामलों में एकसमान मानदंड अपनाने और जमीन आवंटन से जुड़े फैसलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

लोकायुक्त जांच और संभावित राजस्व नुकसान के आकलन की मांग

कांग्रेस ने इस मामले में लोकायुक्त से निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है। पार्टी चाहती है कि वर्ष 2007 के निवेश समझौते, जमीन को योजना से मुक्त करने की प्रक्रिया, भूमि उपयोग परिवर्तन, कॉलोनी विकास और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही, यदि सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ है, तो उसका आकलन भी कराया जाए। पार्टी ने कहा है कि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। मुकेश नायक ने यह भी चेतावनी दी कि उचित कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में कांग्रेस उच्च न्यायालय का रुख करने सहित अन्य कानूनी विकल्प अपनाएगी। फिलहाल, ये आरोप कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। मामले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित कंपनी या अन्य पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।

 

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