Home देश महाराष्ट्र में ‘मातोश्री’ की घटी ताकत, बदल गया सत्ता का ठिकाना!

महाराष्ट्र में ‘मातोश्री’ की घटी ताकत, बदल गया सत्ता का ठिकाना!

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महाराष्ट्र की राजनीति में मातोश्री का कभी जलवा हुआ करता था, हर छोटे-बड़े राजनीतिक फैसले में मातोश्री का महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हुआ करता था। शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के दौर में मातोश्री महाराष्ट्र की राजनीति में कई महत्वपूर्ण फैसले में अहम भूमिका निभाई थी।

लेकिन साल 2019 के विधानसभा के चुनाव के बाद राजनीतिक परिस्थितियों में काफी बदलाव आ गया है। क्योंकि महाराष्ट्र का सीएम बनने का सपना देख रहे उद्धव ठाकरे को राजनीतिक समीकरण तय करने के लिए मातोश्री से बाहर निकलना पड़ा। उद्धव ठाकरे का यह कदम बालासाहेब ठाकरे की परंपरा के मुताबिक बिल्कुल विपरीत है।

महाराष्ट्र में महीनों से चल रहा सियासी ड्रामा खत्म होने के बाद शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एक साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाने को तैयार हैं। गुरूवार को शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के अगले सीएम के रूप में शपथ लेंगे। ऐसे में न सिर्फ प्रदेश की सत्ता बदलेगी, बल्कि किसी जमाने में साउथ मुंबई में राजनीतिक ताकत का मजबूत केंद्र रहे ठाकरे निवास मातोश्री की ताकत भी संभवत: पहले वाली नहीं रह जाएगी।

दरअसल शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे का आवास मातोश्री महाराष्ट्र की राजनीतिक पावर का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। दक्षिण मुंबई में मातोश्री का पॉलिटिकल पावर के मामले में एकछत्र अधिकार था, यह कहना शायद गलत नहीं होगा। लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है। क्योंकि अब उद्धव ठाकरे को शरद पवार के नेपियन सी रोड स्थित आवास पर सिल्वर ओक से अपनी शक्तियां साझा करनी होगी। क्योंकि अब महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार की अहम भूमिका है। ऐसे में उद्धव ठाकरे सिल्वर ओक (शरद पवार का बंग्ला) को हल्के में लेने की गलती कभी नहीं करेंगे। इसके साथ ही सरकार चलाने के लिए अपने हर फैसले में उन्हें अपने नए अलाएंस पार्टनर को महत्व भी देना ही होगा।

क्योंकि महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर गठबंधन के नेताओं को मनाने के लिए उद्धव को अपनी पुरानी परंपरा से कई बार समझौता करना पड़ा है। अब उद्धव मुख्यमंत्री बनने के बाद सीएमओ के साथ-साथ बाकि दोनों ही जगहों पर समय देंगे।

क्योंकि बाला साहेब ठाकरे के जमाने में मातोश्री पर बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली, प्रमोद महाजन, कांग्रेस नेता विलासराव देशमुख जैसे कई राजनीतिक हस्तियां उनके आवास पर मेहमान रह चुकी हैं। इतना ही नहीं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी साल 2012 में राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना से समर्थन मांगने के लिए ठाकरे से मिलने आए थे।

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