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सरकार की साख पर सरकारी कर्मचारी लगा रहे है पलीता

By RNI Hindi Desk 
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सूबे में डबल इंजन की सरकार है ,ये वो सरकार है जिस पर अब तक लगा ईमानदारी का लेबल अभी भी कायम बना हुआ है। बेईमान अफसरों को जेल भेजने और कामचोर कर्मचारियों पर कड़ा रुख अख्तियार करने वाली इस डबल इंजन की सरकार की साख पर अब भी सरकारी महकमे के कुछ कर्मचारी बट्टा लगाने का काम कर रहे हैं।

हम बात कर रहे हैं देवाल विकासखण्ड के दूरस्थ गांव खेता मानमती की जहां पर हजारों,लाखो की आबादी पर एकमात्र आयुर्वेदिक चिकित्सालय है, लेकिन संसाधनों के अभाव में ये अस्प्ताल खुद ही बीमार चल रहा है ,लंबे समय से डॉक्टर की तैनाती न होने की वजह से अस्पताल के अन्य कर्मचारी भी काम की बजाय छुट्टियां मनाने में मशगूल हैं। जब इस चिकित्सालय में पहुंची, तो मरीजों का इलाज करने के लिए केवल एक कक्ष सेवक ही अस्पताल में उपलब्ध दिखे।

दरअसल इस अस्पताल में एक फार्मासिस्ट ओर एक कक्ष सेवक की नियुक्ति वर्तमान में की गयी है, कक्ष सेवक इसी गांव के होने की वजह से अस्पताल में उपलब्ध तो होते हैं लेकिन उनका काम भी महज अस्पताल का ताला खोलना और बन्द करना ही रह गया है। बाकी प्रभारी फार्मासिस्ट की तो यहां के ग्रामीणों ने ढंग से शक्ल तक नहीं देखी। ग्रामीणों के अनुसार यहां तैनात फार्मासिस्ट प्रियंका भारद्वाज महीनों में महज दो या तीन दिन ही अस्पताल पहुंचती हैं। ग्रामीणों के अनुसार फार्मासिस्ट साहिबा जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचती है, उससे कहीं जल्दी अस्प्ताल से गायब भी हो जाती हैं।

हमने ग्रामीणों की शिकायत की पुष्टि के लिए अस्पताल का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के लिए अस्पताल पहुंचे तो ग्रामीणों की शिकायत का जायजा खुद देवाल ब्लॉक प्रमुख उपस्थिति रजिस्टर देखकर ले रहे थे। उपस्थिति रजिस्टर में फार्मासिस्ट साहिबा की हर माह उपस्थिति दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीणों की बात गलत साबित हुई लेकिन जब खुद अस्प्ताल के कक्ष सेवक से जानकारी ली मालूम हुआ, कि फार्मासिस्ट साहिबा महीने का वेतन तो पूरा लेती हैं लेकिन अस्प्ताल में महज महीने भर में बमुश्किल 7-8 दिन ही पहुंचती हैं।

(मोहन गिरी की रिपोर्ट)

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