1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तराखंड
  3. पुलिस के सामने आई बड़ी चुनौती, जेल में बंद अपराधी प्रदेश में मचा रहे दशहत..

पुलिस के सामने आई बड़ी चुनौती, जेल में बंद अपराधी प्रदेश में मचा रहे दशहत..

जेलों में बंद अपराधियों की ओर से जिस तरह रंगदारी, फिरौती और तस्करी की घटनाओं को नेटवर्क के जरिये अंजाम दिया जा रहा है, उससे जेल प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं। बता दें कि उत्तराखंड की जेलों में बंद पश्चिमी उप्र के बदमाश जेल से ही अपना नेटवर्क चला रहे हैं।

By RNI Hindi Desk 
Updated Date

रिपोर्ट:पायल जोशी
जेलों में बंद अपराधियों की ओर से जिस तरह रंगदारी, फिरौती और तस्करी की घटनाओं को नेटवर्क के जरिये अंजाम दिया जा रहा है, उससे जेल प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं। बता दें कि उत्तराखंड की जेलों में बंद पश्चिमी उप्र के बदमाश जेल से ही अपना नेटवर्क चला रहे हैं। इनमें कुख्यात कलीम और पौड़ी जेल में बंद नरेंद्र वाल्मीकि का नाम सामने आ चुका है।

जेलों में बढ़ रही इस तरह की घटनाओं के लिए स्टाफ की मिलीभगत को नकारा नहीं जा सकता है। पिछले महीने उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जेल में बंद बदमाश कलीम के रंगदारी मांगने का पर्दाफाश किया था। बता दें कि एक महीने बाद दूसरी बार अल्मोड़ा जेल में चरस और गांजा तस्करी करवाने का मामला सामने आया है।

इसी महीने एसटीएफ ने पौड़ी जेल में दबिश देकर अपराधियों के नेटवर्क को खत्म किया। जेल में बैठे कुख्यात नरेंद्र वाल्मीकि ने चार व्यक्तियों की हत्या की सुपारी ली थी। इसमें एक महिला और उसके पति को मरवाने के लिए 10 लाख रुपये लिए थे। इस मामले में पुलिस ने नरेंद्र वाल्मीकि के तीन शूटर और हत्या की सुपारी देने वाले दो भाइयों को गिरफ्तार किया। जिसके चलते जेल से चल रहे अपराधियों के नेटवर्क का यह चौथा मामला है।

जेलों से संचालित आपराधिक नेटवर्क के लिए जेल स्टाफ की मिलीभगत को नकारा नहीं जा सकता। अक्टूबर महीने में जेल से रंगदारी और चरस तस्करी गिरोह संचालित कर रहे कुख्यात बदमाश कलीम के बैरक से पुलिस नकदी और मोबाइल बरामद किए थे। इस मामले में चार अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज भी गिरी। यदि जेलों की सही ढंग से मानिटरिंग होती रहे तो इस तरह के मामलों पर रोक लगाई जा सकती है। हालांकि, जेल अधिकारी इसके पीछे क्षमता से अधिक कैदियों की संख्या को भी कारण बता रहे हैं।

आपको बता दें कि जेलों में सुरक्षा की योजनाएं बनाई जा रही है, लेकिन यह फाइलों तक ही सीमित होकर रह गई हैं। लगातार कैदियों के बैरकों से मोबाइल फोन बरामद हो रहे हैं। लेकिन लंबे समय बाद भी जेलों में आधुनिक जैमर नहीं लग पाए हैं। बताया जा रहा है कि प्रदेश में 11 जेल और दो उप जेल हैं। जिसके चलते देहरादून, रुड़की, सितारगंज और पौड़ी जेलों में नामी बदमाश बंद हैं। जेलों से गैंग चलाने की घटनाओं में कमी नहीं आई, तो जिसके कारण पड़ताल की गई। पता चला कि जेलों में जैमर तो लगे हैं, लेकिन वे केवल थ्री जी सिम के सिग्नल ही रोक पा रहे हैं। फोर जी सिम वाले मोबाइल फोन के सिग्नल को नही रोक पा रहे हैं।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...