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उत्तराखंड में बाढ़ से मचा हाहाकार, डूबे बाजार के बाजार, ट्रैक्टर-ट्रॉली पर गाड़ी रखकर सड़क पार कर रहे लोग; जानिए लोगों ने क्या कहा।

उत्तराखंड मे पिछले कुछ दिन से हो रही लगातार भारी बारिश के कारण पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। ऑफिशियल रिकार्ड के अनुसार अब तक 52 लोगो कि मौत हो चुकी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोगों के पास खाने तक को कुछ नहीं बचा है। सड़कों का बुरा हाल है। सड़कें, सड़कें न रह कर स्विमिंग पूल बन चुकी हैँ। बाढ़ का पानी इतना ज्यादा है कि बाजार के बाजार डूब चुके हैं।

By RNI Hindi Desk 
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रिर्पोट: अनुष्का सिंह

नई दिल्ली: उत्तराखंड मे पिछले कुछ दिन से हो रही लगातार भारी बारिश के कारण पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। ऑफिशियल रिकार्ड के अनुसार अब तक 52 लोगो कि मौत हो चुकी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोगों के पास खाने तक को कुछ नहीं बचा है। सड़कों का बुरा हाल है। सड़कें, सड़कें न रह कर स्विमिंग पूल बन चुकी हैँ। बाढ़ का पानी इतना ज्यादा है कि बाजार के बाजार डूब चुके हैं। वहीं सरकार कि तरफ से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन ज़ारी है और लोगों को राहत सामाग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

जानिए कैसा है उत्तराखंड का हाल

कुछ लोगो ने बताया कि “कल शाम हमने करीब 6 बजे पानी का स्तर बढ़ते देखा। हम दुकानदारों को बताने गए, लेकिन जब तक हम पहुंचे तब तक मार्केट डूब चुका था।“ एक व्यक्ती ने बताया कि, “मेरा जन्म और पालन-पोषण रामपुर में ही हुआ। मैंने अभी तक ऐसी बाढ़ नहीं देखी। मुझे उम्मीद है कि तीन-चार दिन में पानी उतर जाएगा।” एक महिला का कहना है कि यह एक बुरे सपने से भी भयानक है। पानी भर जाने की वजह से आने-जाने का कोई साधन नहीं है। महिला ट्रैक्टर के जरिए आ-जा रही हैं और इसके लिए एक बार के 100 रुपये देने को मजबूर हैं। वहीं अन्य महिला का कहना है कि कोई भी एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा सकता। डूबने का डर है क्योंकि पानी कम नहीं हो रहा है। मेरा घर दूसरी तरफ है, इसलिए मेरे पास पैसे खर्च करने और ट्रैक्टर-ट्रॉली में सफर करने के अलावा कोई और दूसरा रास्ता नहीं है।

गौरतलब है कि पहाड़ी इलाको से पानी अब कम हो चुका है। लेकिन मैदानी इलाकों में अभी भी कहर है। जिसके चलते कम्युनिकेशन कटा हुआ है। कहीं जाने के लिए या तो बाढ़ के पानी से होते हुए गुजरना पड़ रहा है या फिर ट्रैक्टर पर अपनी गाड़ी रखकर रास्ता पार करना पड़ रहा है। लेकिन एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं और अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकाला जा चुका है। एनडीआरएफ की ओर से जो तस्वीरें शेयर की गई हैं, उसमें दिख रहा है कि सड़कों पर अब सिर्फ कीचड़ और मलबा ही रह गया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ट्रैकर्स समेत कई लोग अब भी लापता हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहत कार्यों के लिए हर डीएम को 10-10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। साथ ही जान गंवाने वालों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान भी किया है।

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