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गोरखपुर: नेपाल के काम नहीं आई चीन की दोस्ती , दो सौ रुपये किलो पहुंची प्‍याज की कीमत

By RNI Hindi Desk 
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गोरखपुर : आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह से घिरे नेपाल में प्याज की किल्लत बढ़ गई है। 14 सितंबर से प्याज के निर्यात पर भारत के प्रतिबंध लगाए जाने से वहां कालाबाजारी शुरू हो गई है। जमाखोरी बढ़ने से पड़ोसी देश में प्याज 150 से 200 रुपये प्रति किलो बिक रही है। मूल्य को नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार द्वारा उठाए गए कदम भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। हालांकि भारत के प्रतिबंध के बाद चीन ने प्याज का निर्यात बढ़ा दिया है।

चीन रसुआ बार्डर के रास्ते नेपाल को प्याज निर्यात कर रहा है। इसके बाद भी कीमतों में आई तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है। काली माटी फ्रूट्स एंड वेजिटेबल मार्केट डवलपमेंट एसोसिएशन के मुताबिक नेपाल में प्याज की कीमतें थोक भाव में 120 रुपये किलो पहुंच गईं हैं।

जिसे फुटकर व्यापारी 200 रुपये से अधिक में बेच रहे हैं। निर्यात पर प्रतिबंध से पूर्व नेपाल में प्याज 20 से 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में उपलब्ध थी।

प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार सक्रिय हो गई है। काली माटी फल और सब्जी विकास समिति के सूचना अधिकारी विनय श्रेष्ठ के मुताबिक अब तक कालाबाजारी के आरोप में 10 थोक व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनकी दुकानों व गोदामों को सील कर तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

नेपाल के पहाड़ी जिले गोरखा, पाल्पा, दांग, सल्यान आदि में प्याज ऊंचे दामों पर बिक रही है।खुदरा सब्जी विक्रेता सरस्वती श्रेष्ठा ने बताया कि शनिवार को 110 रुपये थोक मूल्य से प्याज खरीदी गई।

फेडरेशन आफ फ्रूट्स एंड वेजिटेबल एंटर प्रेनन्योर्स के अध्यक्ष खोम प्रसाद धिमरे ने थोक व्यापारियों द्वारा की जा रही कालाबाजारी को अनुचित बताया है।

नेपाल का सब्जी बाजार पूरी तरीके से भारत पर निर्भर है। आलू, प्याज सहित अन्य सब्जियों का निर्यात बड़े पैमाने पर भारत से होता है। सोनौली सीमा के रास्ते प्रतिदिन औसत रूप से 100 मालवाहक छोटे-बड़े वाहनों से सब्जियां नेपाल जाती हैं।निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद 35 प्याज लदे ट्रक सीमा पर रोके गए हैं।

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