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आखिरी मतदान में कौन होगा किस पर भारी? विधानसभा चुनाव में 10 मार्च को खुलेगा किस्मत का पिटारा

आखिरी चरण मे होने वाले चुनाव के लिये आज प्रचार थम जायगा, और इस चरण मे बीजेपी काफी आक्रामक दिख रही है। बीजेपी ने अपने दिग्गजों को चुनाव प्रचार में पूरी तरह से उतार दिया है। इसी चरण मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी मतदान होना है। अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ की विधानसभा सीटों पर भी इसी चरण में चुनाव होने हैं।

By RNI Hindi Desk 
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के लिये अबतक छह चरणों के मतदान हो चुके हैं और अब चुनाव अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 403 सीटों मे से बची 54 सीटों का चुनाव सातवें चरण मे यानी सात फरवरी को होगा। और इस अंतिम चरण मे होने वाली वोटिंग को काफी अहम माना जा रहा है। आखिरी चरण मे होने वाले चुनाव के लिये आज प्रचार थम जायगा, और इस चरण मे बीजेपी काफी आक्रामक दिख रही है। बीजेपी ने अपने दिग्गजों को चुनाव प्रचार में पूरी तरह से उतार दिया है।

इसी चरण मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी मतदान होना है। अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ की विधानसभा सीटों पर भी इसी चरण में चुनाव होने हैं। अंतिम चरण की अहमियत को समझते हुए पीएम मोदी ने खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली है। कल पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी मे रोड शो किया, जिसमे एक जनसैलाब उमड़ते देखा गया। वहीं अखिलेश यादव ने भी इस अंतिम चरण मे अपनी पूरी ताकत झोंक कर रख दी। अखिलेश यादव ने भी कल वाराणसी मे देर रात तक रोड शो कर अपनी ताकत दिखाई।

पहले चरण के चुनाव मे पश्चिमी यूपी को साधने के लिए वादों के तौर पर बिसात तैयार की गई थी। बीजेपी ने संकल्प पत्र के नाम से अपना घोषणापत्र जारी किया तो समाजवादी पार्टी ने वचन पत्र के नाम से अपना घोषणा पत्र जारी किया। दोनों ही पार्टियों के वादों की लिस्ट में किसानों को लुभाने की कोशिश साफ साफ देखा गया, जिसमे बीजेपी अपने संकल्प पत्र में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, 25 हज़ार करोड़ की लागत के साथ मुख्यमंत्री कृषि सिंचाई योजना, गन्ना किसानों को 14 दिनों के अंदर भुगतान, हर परिवार को एक रोजगार का वादा, लव जिहाद रोकने के लिए 10 साल की सजा, और यूपी में 6 मेगा फूड पार्क विकसित करने का बीजेपी ने वादा कर वोटरों को साधने की कोशिश की, तो वहीं अखिलेश यादव ने भी अपने वचन पत्र में एलान कर कहा कि समादवादी सरकार बनने पर 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी, हर फसल के लिए एमएसपी होगी, किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त दी जाएगी, 15 दिन में गन्ना किसानों का भुगतान होगा, समाजवादी पेंशन आदि योजना को फिर से शुरू करने के वादों को कर अखिलेश यादव ने भी वोटरों को साधने का पूरा प्रयास किया।

वहीं दूसरे चरण की बात करें तो इस चरण मे मुस्लिम वोटरों की भुमिका अहम मानी गई। दूसरे चरण में सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर में वोट डाले गये। इन सीटों पर मुस्लिम वोटर की तादात सबसे ज्यादा है। इसके बाद यहां जाट वोटों के साथ कुर्मी और लोधी वोटर निर्णायक भूमिका में है।

2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस गठबंधन में था, जिसका फायदा भी मिला था। सपा को यहां 15 सीटों पर जीत मिली थी, इनमें 10 मुस्लिम प्रत्याशी जीतकर विधायक बने थे। जबकि कांग्रेस के दो प्रत्याशी जीते थे, इनमें एक मुस्लिम और दूसरा सैनी समाज से विधायक बना था।

वहीं तीसरे चरण में जिन जिलों में चुनाव हुए हैं, उनमें हाथरस, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा शामिल हैं। इस चरण में यादव लैंड कही जाने वाले इटावा और मैनपुरी जिलों पर लोगों की खास नज़र रही। मैनपुरी के करहल सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव भी चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा शिवपाल यादव, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल, सतीश महाना, लुईस खुर्शीद, असीम अरुण और इरफान सोलंकी जैसे दिग्गज उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम मे बंद हो गया। करहल विधानसभा, कन्नौज, जसवंतनगर, इटावा, फर्रुखाबाद विधानसभा आदि इस चरण की हाई प्रोफाइल सीटें रहीं। तीसरे चरण में 16 जिलों में कुल 59 सीटों के लिये मतदान हुआ।

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