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संभल : कोरोना वारियर्स के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने कैंसर पीड़ित मनोज पाठक और उनकी पत्नी

By RNI Hindi Desk 
Updated Date

{ सतीश की रिपोर्ट }

कैंसर पीड़ित मनोज पाठक और उनकी पत्नी हेमा पाठक चंदौसी में सयुंक्त चिकित्सालय में फार्मेसिस्ट के पद पर तैनात है। स्वास्थ्य कर्मी मोहन पाठक पिछले 5 वर्षो से मुंह के कैंसर की गंभीर वीमारी से पीड़ित है।

कैंसर के इलाज के लिए मोहनपाठक के अब तक 5 आपरेशन हो चुके है, ऑपरेशन के दौरान उनके मुंह का पूरा जबड़ा निकाला जा चुका है जिसकी वजह से मोहन पाठक पिछले 5 वर्षो से सिर्फ तरल पदार्थ ही ले रहे है।

मोहन पाठक किसी प्रकार का ठोस खाद्य पदार्थ नहीं खा सकते और इन तमाम गंभीर समस्याओं से जूझने के बाबजूद स्वास्थ्य कर्मी मोहन पाठक अपने ड्यूटी के फर्ज को जिन्दादिली के साथ निभा रहे है।

कैंसर से जूझ रहे मोहन पाठक 23 मार्च से देश में लॉक डाउन के वाद अपनी पीड़ा भूलकर अस्पताल में आने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच और इलाज से लेकर अपने फार्मेसिस्ट के पद की जिम्मेदारियां निभा रहे है।

कोरोना वारियर्स के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने स्वास्थ्य कर्मी मोहन पाठक गर्व से कहते है ‘ जब तक जान है ,जहान के लिए अपने फर्ज से पीछे नहीं हटेंगे।

खास वात यह है की कैंसर पीड़ित कोरोना वारियर्स मोहन पाठक की पत्नी हेमा पाठक भी सयुंक्त चिकित्सालय में फार्मेसिस्ट के पद पर तैनात है और उनके साथ कंधे से कन्धा मिला कर कोरोना को हराने के लिए लड़ी जा रही जंग में मोहन पाठक का साथ दे रही है।

हेमा पाठक कहती है की उन्हें अपने पति मोहन पाठक पर गर्व है जो कि अपनी गंभीर वीमारी की पीड़ा को भूलकर अपनी डयूटी के फर्ज को निभाकर कोरोना से जंग में अपना योगदान दे रहे है.

हालंकि कोरोना संक्रमण के खतरे के चलते खुद को भी सुरक्षित रखना बड़ी जिम्मेदारी है ,इसके लिए वह अपने पति मोहन पाठक के खाने -पीने ,और दवाइयो का पूरा ध्यान रखती है।

लॉक डाउन को 2 महीने बीत चुके है लेकिन इस दौरान लगातार ड्यूटी कर रहे स्वास्थ्य कर्मी मोहन पाठक और उनकी पत्नी हेमा पाठक के होंसले में जरा भी कमी नहीं आई है।

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