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Lakhipur kheri violence : खून से भरा है दामन तुम्हारा, तुम क्या दोगे साथ हमारा; 1984 दंगों की याद दिलाई

‘खून से भरा है दामन तुम्हारा, तुम क्या दोगे साथ हमारा’, ये शब्द है होर्डिंग्स पोस्टर के, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लखीमपुर खिरी में आने से पहले लगा है। साथ ही इसमें 1984 के दंगों का भी जिक्र है। जिसके जरिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनके ही सरकार के काला इतिहास को याद दिलाने की कोशिश की जा रही है।

By Amit ranjan 
Updated Date

लखनऊ : ‘खून से भरा है दामन तुम्हारा, तुम क्या दोगे साथ हमारा’, ये शब्द है होर्डिंग्स पोस्टर के, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लखीमपुर खिरी में आने से पहले लगा है। साथ ही इसमें 1984 के दंगों का भी जिक्र है। जिसके जरिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनके ही सरकार के काला इतिहास को याद दिलाने की कोशिश की जा रही है। आपको बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पहले ही लखनऊ आने से मना कर दिया गया है। इसके बावजूद भी वो लखनऊ की ओर कूच कर गये है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लखनऊ दौरे को लेकर सिख समुदाय (Sikh Community) में काफ़ी आक्रोश है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के लखनऊ आने से पहले लखनऊ में जगह-जगह होर्डिंग्स लगे हैं, होर्डिंग्स में राहुल गांधी को 1984 दंगों की याद दिलाई गई है। होर्डिंग में लिखा है ‘ नहीं चाहिए फर्जी साहनुभूति, राहुल गांधी वापस जाओ, प्रियंका गांधी वापस जाओ, सिक्खों के कातिल वापस जाओ, नहीं चाहिए साथ तुम्हारा’। इन पोस्टर्स में सरदार परविन्दर सिंह (सदस्य, अल्पसंख्यक आयोग0 सरदार त्रिलोचन सिंह (अध्यक्ष, साहेब श्री गोविंद सिंह सेवा समिति), राजेंद्र सिंह बग्गा (अध्यक्ष, गुरूद्वारा द्वारा गुरु सिंह सभा), रविन्द्र पाल सिंह (अध्यक्ष, गुरुनानक वाटिका कमेटी)   समेत सिक्ख समुदाय के कई लोगों का नाम लिखा है।

ताजा जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को लखीमपुर खीरी का दौरा करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। घटना के बाद 3 अक्‍टूबर से ही यहां पर धारा 144 लागू है। इससे पहले कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राज्‍य सरकार से कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को क्षेत्र का दौरा करने की इजाजत मांगी थी।

हिंसा के बाद नेताओं का पर्यटक स्थल बना लखीमपुर खीरी

लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद से ही पूरे देश मे राजनीति देखने को मिल रही है। हालांकि यूपी में इसका ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। हिंसा के बाद से ही नेताओं की टोली लखीमपुर खीरी जाने के लिए परेशान है। घटना के बाद से ही एकाएक सभी नेता जद्दोजहद कर रहे हैं। घटना के दिन रविवार को ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दिल्ली से लखीमपुर खीरी निकल गईं थी लेकिन यूपी पुलिस ने उन्हें सीतापुर में ही रोक दिया।

राहुल गांधी लखीमपुर खीरी जाने के लिए रवाना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी लखीमपुर खीरी जाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने योगी सरकार से इजाजत मांगी थी। राहुल गांधी सहित 5 कांग्रेस नेताओं का डेलिगेशन लखीमपुर खीरी जाना चाहता था। लेकिन योगी सरकार ने उनको इजाजत नहीं दी है। इसके बावजूद वो लखीमपुर खीरी के लिए रवाना हो गए है। बता दें कि इससे पहले हाथरस कांड में भी राहुल गांधी वहां जाना चाहते थे तब भी उन्हें इजाजत नहीं दी गई थी। लेकिन बाद में उन्हें हाथरस जाने दिया गया था।

राहुल गांधी के लखीमपुर खीरी जाने से सिख समुदाय नाराज

राहुल गांधी के लखीमपुर खीरी जाने से सिख समुदाय नाराज है। उन्हें फर्जी की सहानुभूति न देने की हिदायत दी गई। सिख नेताओं ने राहुल गांधी का विरोध करते हुए लखनऊ में होर्डिंग्स लगाई गई हैं।

जानिए क्या है 1984 दंगा

बता दें कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख दंगे भड़क गए थे। दरअसल इंदिरा गांधी की हत्या करने वाले उनके अंगरक्षक ही थे। और दोनों ही अंगरक्षक सिख थे, जिसके बाद देश में लोग सिखों के खिलाफ भड़क गए थे। इस घटना के बाद देश में खून की होली खेली गई थी। माना जाता है कि इन दंगों में पांच हजार लोगों की मौत हो गई थी। अकेले दिल्ली में करीब दो हजार से ज्यादा लोग मारे गये थे।

दंगों के बाद सीबीआई ने कहा था कि यह दंगे कांग्रेस सरकार और दिल्ली पुलिस ने मिल कर कराए हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई पेड़ गिरता है तो पृथ्वी हिलती है। उनका यह बयान काफी सुर्खियों में रहा था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर सिखों के गुस्से की वजह यह थी कि 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उन्होंने भारतीय सेना को स्वर्ण मंदिर पर कब्जा करने का आदेश दिया था। इस दौरान मंदिर में घुसे सभी विद्रोहियों को मार दिया गया था। जो कि ज्यादातर सिख ही थे। इन सभी हथियारों से लैस विद्रोहियों ने स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया था।

इनकी मांग थी कि ये खालिस्तान नाम का अगल देश चाहते थे। जहां केवल सिख और सरदार कौम ही रह सके। इसका सरकार ने कड़ा विरोध किया और इन अलगाववादियों पर कार्रवाई की। इस दौरान हुए आप्रेशन को आप्रेशन ब्लू स्टार कहा जाता है। इन खालिस्तानियों का नेतृत्व सिख धर्म गुरु सरदार जरनैल सिंह भिंडरावाले ने किया था।

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