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सहारनपुर और पीलीभीत में भी सपा के साथ हो गया खेल, BJP की लगी लाटरी

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

पीलीभीत: यूपी में चल रहे जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनान अपने चरम पर आ गया है। वहीं इस चुनाव का समींकरण तेजी से बदल रहा है। उम्मीदवारों के नमांकन पत्र दाखिल होते हो करीब 15 से अधिक जिलों का परिणाम सामने आ गया। इसी कड़ी में बात करें पीलीभीत और सहारनपुर की तो यहां भी ‘खेल’ हो गया।

बात करें पीलीभीत की तो समाजवादी पार्टी (सपा) जिला पंचायत पद के लिए बनाए गए प्रत्याशी स्वामी प्रवक्तानंद उर्फ़ जयद्रथ फिर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में वापस आ गए। इसके बाद उन्होने नाम वापस ले लिया। जिससे  भाजपा प्रत्याशी डॉ दलजीत कौर जिला पंचायत अध्यक्ष बन गई। नाम वापसी के अंतिम दिन आज भाजपा का मंगल हो गया। इससे सपा खेमे में मायूसी है।

वहीं बात करें सहारनपुर की तो यहां एक मात्र विपक्षी उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चौधरी मांगेराम को सहारनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष विजयी घोषित कर दिया। जिलाधिकारी ने बताया कि बसपा प्रत्याशी के नाम वापस लेने से भाजपा के मांगेराम का अकेला नामांकन पत्र रह जाने से उन्हें नाम वापसी की अवधि तीन बजे के बाद विजयी घोषित कर दिया ।

सहारनपुर के समींकरण को देखें तो यहां जिला पंचायत में 49 सदस्य हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए 26 जून को नामांकन के वक्त बसपा के घोषित उम्मीदवार शिमला देवी ने नामांकन दाखिल नहीं किया था। उनके स्थान पर अंतिम समय में वार्ड 38 के जिला पंचायत सदस्य जसवीर सिंह गुर्जर ने अपना नामांकन दाखिल किया था। बसपा अध्यक्ष मायावती ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ने की सोमवार को घोषणा कर दी थी।

जिसके बाद जयवीर सिंह ने मंगलवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। बसपा के जिलाध्यक्ष योगेश कुमार ने कहा कि पार्टी यह चुनाव जीतने की स्थिति में थी और उसे सपा और कांग्रेस का समर्थन भी प्राप्त था। लेकिन सत्ता के दबाव और भाजपा नेताओं के प्रलोभन के चलते बसपा नेता खटाना ने अंतिम समय पर अपनी मां शिमला देवी का नामांकन नहीं कराया जिससे बसपा के साथ-साथ पूरे विपक्ष को झटका लगा।

जबकि सपा जिलाध्यक्ष चौधरी रूद्र सैन ने कहा कि हमारी पार्टी का बसपा को समर्थन था और यदि हम लोगों को यह लगता कि बसपा में गड़बड़ है ,तो उसका घोषित उम्मीदवार ऐन मौके पर चुनाव मैदान से पलायन कर जाएगा तो हमारी पार्टी समय रहते अपना उम्मीदवार मैदान में जरूर उतारती। सपा के पांच निर्वाचित सदस्य हैं। कांग्रेस के आठ सदस्य हैं। कांग्रेस के  सचिव इमरान मसूद भी बसपा में हो रहे अंदरूनी घटनाक्रमों का अंदाजा नहीं लगा पाए।

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